नई दिल्ली (ईएमएस)। आम धारणा है कि अधिक मीठा खाने से ही डायबिटीज होती है, जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में विटामिन डी की कमी भी डायबिटीज का खतरा बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण कारकों में से एक हो सकती है। विटामिन डी को आमतौर पर हड्डियों की मजबूती से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह शरीर के कई जरूरी कार्यों में अहम भूमिका निभाता है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने, मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने और इंसुलिन के कार्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। इंसुलिन वह हार्मोन है जो शरीर में ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है। जब शरीर में विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है, तो इंसुलिन प्रभावी ढंग से काम करता है। लेकिन इसकी कमी होने पर इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगता है और लंबे समय में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि विटामिन डी की कमी धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करती है, इसलिए कई बार इसके शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। लगातार थकान महसूस होना, बिना ज्यादा काम किए कमजोरी लगना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, बार-बार बीमार पड़ना और रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना इसके प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। इसके अलावा मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं भी इसके संकेत हो सकते हैं। कुछ लोगों में तेजी से वजन बढ़ना या वजन कम न होना भी विटामिन डी की कमी की ओर इशारा करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस कमी को दूर करने के लिए सबसे आसान और प्राकृतिक उपाय नियमित रूप से धूप लेना है। रोजाना सुबह 20 से 30 मिनट धूप में रहने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिल सकता है। इसके साथ ही अंडे की जर्दी, दूध, डेयरी उत्पाद, मशरूम और अनाज जैसे खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना भी फायदेमंद माना जाता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से विटामिन डी के सप्लीमेंट भी लिए जा सकते हैं। डायबिटीज से पूरी तरह बचाव संभव न सही, लेकिन समय रहते सावधानी बरतकर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित रखना भी ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करता है। मालूम हो कि आज के समय में डायबिटीज तेजी से फैलने वाली बीमारियों में शामिल हो गई है। पहले इसे बढ़ती उम्र से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब कम उम्र के लोग भी बड़ी संख्या में इसकी चपेट में आ रहे हैं। सुदामा/ईएमएस 12 मार्च 2026