राष्ट्रीय
12-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। अनियंत्रित गुस्सा लंबे समय में दिल की बीमारियों, हाई ब्लड प्रेशर, अनिद्रा और तनाव जैसी समस्याओं की जड़ बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गुस्सा इंसानी स्वभाव का सामान्य हिस्सा है, लेकिन जब यह नियंत्रण से बाहर हो जाए तो शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर असर डाल सकता है। आयुर्वेद में भी गुस्से को पित्त और कफ दोष के असंतुलन से जोड़ा जाता है, जो मन और शरीर दोनों में उथल-पुथल पैदा करता है। इसलिए अचानक गुस्सा आने पर तुरंत कुछ सरल उपाय अपनाना जरूरी है, ताकि स्थिति बिगड़ने से पहले आप खुद को शांत कर सकें। गुस्सा आने पर सबसे पहले शरीर तनाव मोड में चला जाता है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। ऐसे में सांस पर ध्यान केंद्रित करना बेहद प्रभावी उपाय है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि दीप ब्रीदिंग नर्वस सिस्टम को शांत करती है और मस्तिष्क को इमोशनल मोड से लॉजिकल मोड में लाती है। इसके लिए चार सेकंड तक सांस अंदर लें, सात सेकंड रोकें और आठ सेकंड में धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। यह तकनीक कुछ ही मिनटों में तनाव दूर कर मन को शांत करना शुरू कर देती है। गुस्सा बढ़ने के दौरान शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है। ऐसे में एक गिलास ठंडा पानी धीरे-धीरे पीना तुरंत राहत देता है। यह न केवल शरीर को ठंडक देता है बल्कि दिमाग की गर्मी भी कम करता है। आयुर्वेद में पानी को मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखने का प्राकृतिक साधन माना गया है। किसी विवाद या तकरार की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ मिनट के लिए खुद को उससे दूर करना भी बहुत लाभदायक है। पांच मिनट का मौन और शांत जगह पर जाने से गुस्से की तीव्रता घटती है और आपको स्थिति स्पष्ट रूप से समझने का समय मिलता है। इस दौरान आपका मस्तिष्क उत्तेजना से हटकर स्थिरता की ओर बढ़ता है, जिससे आप बेहतर और संतुलित प्रतिक्रिया दे पाते हैं। इनके अलावा योग और ध्यान का नियमित अभ्यास गुस्से को जड़ से नियंत्रित करने में मदद करता है। अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और कपालभाति प्राणायाम मानसिक संतुलन बनाते हैं और पित्त दोष को संतुलित करके मन को स्थिर करते हैं। आयुर्वेद कई प्राकृतिक उपाय भी सुझाता है। तुलसी के पत्ते चबाने, तुलसी की चाय, हल्दी दूध या अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियाँ मन को शांत करने में प्रभावी मानी गई हैं। सुदामा/ईएमएस 12 मार्च 2026