नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली हाई कोर्ट ने रेलवे में जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू प्रसाद यादव की याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा है। लालू ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी है। कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। रेलवे में जमीन के बदले नौकरी से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) से जवाब मांगा है। मामले पर संक्षिप्त सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने सीबीआई को नोटिस जारी कर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले पर अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। साथ ही लालू के करीबी सहयोगी भोला यादव की याचिका पर भी सुनवाई होगी। इस याचिका में कुछ आरोपितों को माफ करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है और उन्हें सरकारी गवाह बनने की इजाजत दी गई थी। सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं बनता क्योंकि रेल मंत्री के तौर पर भर्ती से उनका कोई लेना-देना नहीं था। याचिका में लालू प्रसाद यादव ने उनके खिलाफ आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद करने की मांग की है। राउज एवेन्यू की विशेष अदालत ने जनवरी माह में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ आरोप तय किए थे। अदालत ने लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी यादव, बेटे व पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ आरोप तय किए थे। अदालत ने कहा था कि आरोपितों के खिलाफ पहली नजर में भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला बनता है। मामला 2004 से 2009 तक के समय से जुड़ा है। इस दौरान लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि लालू यादव के परिवार के नाम और उनसे जुड़े एक कंपनी के नाम पर बाजार मूल्य से कम कीमत पर जमीनें खरीदी गईं और इनका भुगतान नकद किया गया। इसके बदले में रेलवे में विभिन्न क्षेत्रों में नौकरियां दी गईं थीं। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ ईएमएस/12/मार्च /2026