हिजबुल्लाह ने इजराइल पर दागीं 150 मिसाइलें, 24 घंटे में 179 लोग घायल, ईरान अमेरिकी ठिकानों पर कर रहा ताबड़तोड़ हमले... एफबीआई की चेतावनी-अमेरिका पर भी ईरानी हमले का खतरा अमेरिका जल्द खत्म करेगा जंग! -ट्रंप-नेतन्याहू ने ईरान की ताकत का नहीं लगा पाए अंदाजा, तेल सप्लाई ठप होगी सोचा नहीं था -अमेरिका और इजराइल जमीनी सैन्य कार्रवाई करने की रणनीति को लेकर अभी असमंजस में वॉशिंगटन/तेल अवीव/तेहरान(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में चल रही अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग में अमेरिका-इजराइल की रणनीति लगभग विफल हो गई है। इजराइल को ईरान के साथ-साथ पड़ोसी देश लेबनान के उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है। ईरान समर्थक हिजबुल्लाह ने इजराइल पर 150 मिसाइलें दागीं। इजराइल के एयर डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर रॉकेट और मिसाइलों रोक दिया, लेकिन कुछ जगहों पर मलबा गिरने से आग लग गई। इसी बीच इजराइल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अलग-अलग हमलों में देश भर में पिछले 24 घंटे में 179 लोग घायल हुए हैं। जबकि जंग शुरू होने के बाद से अब तक कुल 2,745 लोग घायल हो चुके हैं। उधर अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने कैलिफोर्निया के पुलिस विभाग को चेतावनी दी है कि ईरान, अमेरिका के पश्चिमी तट पर जवाबी हमला कर सकता है। अमेरिका और इजराइल लगातार दो हफ्ते से ईरान में एयरस्ट्राइक कर रहे हैं, इसके बावजूद ईरान की सत्ता अभी भी काफी मजबूत है और उसके जल्द गिरने का कोई खतरा नहीं है। यह बात अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में सामने आई है। एक सूत्र के मुताबिक कई खुफिया रिपोर्टों में एक जैसा आकलन किया गया है कि ईरान की सरकार गिरने की स्थिति में नहीं है और वह अभी भी देश की जनता पर कंट्रोल बनाए हुए है। वहीं, तेल की कीमतों में इजाफे की वजह से राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द जंग खत्म कर सकता है। हालांकि अगर ईरान के कट्टरपंथी नेता सत्ता में बने रहते हैं तो युद्ध खत्म करने का रास्ता निकालना आसान नहीं होगा। ईरान की मौजूदा सरकार गिरेगी यह तय नहीं खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद वहां की धार्मिक नेतृत्व वाली व्यवस्था अभी भी एकजुट बनी हुई है। इजराइल के एक सीनियर अधिकारी ने भी रॉयटर्स से कहा कि सीक्रेट मीटिंग्स में भी यही बात निकल कर सामने आई है कि फिलहाल ईरान की मौजूदा सरकार गिरने की कोई संभावना नहीं है। सूत्रों ने यह भी कहा कि जमीन पर हालात बहुत तेजी से बदल रहे हैं और आने वाले समय में ईरान के अंदर की स्थिति अलग दिशा में जा सकती है। लीडरशिप का ईरान पर कंट्रोल अमेरिका और इजराइल ने युद्ध शुरू होने के बाद ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, परमाणु ठिकाने और टॉप लीडरशिप से जुड़े लोग शामिल हैं। ट्रम्प प्रशासन ने इस युद्ध के अलग-अलग कारण बताए हैं। युद्ध शुरू करते समय ट्रम्प ने ईरान की जनता से कहा था कि वे अपनी सरकार को खुद बदल दें। हालांकि बाद में उनके सीनियर अधिकारियों ने कहा कि ईरान की सरकार को हटाना इस ऑपरेशन का मकसद नहीं है। हमलों में खामेनेई के अलावा कई सीनियर अधिकारी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स के कई बड़े कमांडर भी मारे गए हैं। यह ईरान की एक शक्तिशाली पैरामिलिट्री फोर्स है, जो देश की अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से को कंट्रोल करती है। ईरान में अमेरिकी सैनिक जंग लडऩे जाएंगे यह साफ नहीं इस हफ्ते ईरान के सीनियर शिया धर्मगुरुओं की संस्था ‘असेंबली ऑफ एक्सपट्र्स’ ने खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित कर दिया है। एक अन्य सूत्र के मुताबिक इजराइल का इरादा यह है कि मौजूदा ईरानी शासन का कोई हिस्सा भी सत्ता में न बचा रहे। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका और इजराइल का मौजूदा ऑपरेशन सरकार को कैसे गिरा पाएगा। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए संभवत: जमीनी सैन्य कार्रवाई करनी पड़ेगी, जिससे ईरान के अंदर लोग सडक़ों पर उतरकर विरोध कर सकें। ट्रम्प प्रशासन ने अभी तक ईरान में अमेरिकी सैनिक भेजने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। ईरानी कुर्द के पास लडऩे की ताकत नहीं हालांकि अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में यह शक जताया गया है कि ईरानी कुर्द समूह लंबे समय तक ईरानी सुरक्षा बलों से लडऩे की क्षमता नहीं रखते। दो सूत्रों के मुताबिक उनके पास न तो पर्याप्त हथियार हैं और न ही पर्याप्त संख्या में लड़ाके। सूत्रों के मुताबिक हाल के दिनों में ईरानी कुर्द समूहों ने वॉशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों और सांसदों से हथियार और बख्तरबंद वाहन देने की मांग की है। लेकिन ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि उन्होंने ईरानी कुर्द समूहों को ईरान में भेजने का विचार फिलहाल खारिज कर दिया है। ईरान में मौजूद सत्ता को गिराना आसान नहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की खुफिया एजेंसियों की एक सीक्रेट रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर अमेरिका, ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला भी करे, तब भी वहां की मौजूदा सत्ता को गिराना आसान नहीं होगा। यह आकलन नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की सैन्य और धार्मिक नेतृत्व वाली व्यवस्था इतनी मजबूत है कि उसे हटाना मुश्किल होगा। यह रिपोर्ट अमेरिका और इजराइल की तरफ से 28 फरवरी को ईरान पर हमला शुरू करने से करीब एक हफ्ते पहले तैयार की गई थी। इसमें अलग-अलग संभावनाओं का आकलन किया गया था, जैसे कि अगर ईरान के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया जाए या सरकार और संस्थानों पर बड़ा हमला किया जाए। ईरान में विपक्षी ताकतों के सत्ता में आने की संभावना कम रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद भी वहां की सत्ता व्यवस्था टूटने के बजाय तय प्रोसेस के तहत नया नेतृत्व चुन लेगी और सरकार चलती रहेगी। खुफिया आकलन में यह भी कहा गया कि ईरान की बिखरी हुई विपक्षी ताकतों के सत्ता में आने की संभावना बहुत कम है। नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल अमेरिका की 18 खुफिया एजेंसियों के सीनियर एक्सपट्र्स का एक ग्रुप है, जो मिलकर ऐसी सीक्रेट रिपोर्ट तैयार करते हैं। व्हाइट हाउस ने इस पर सीधे टिप्पणी नहीं की है और यह भी साफ नहीं किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सैन्य अभियान शुरू करने से पहले इस रिपोर्ट की जानकारी दी गई थी या नहीं। विनोद उपाध्याय / 12 मार्च, 2026