-सेक्शन 301 के तहत जांच शुरू की, अनुचित व्यापार के सबूत मिले तो भारी टैक्स लगेगा वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन समेत अपने 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ सेक्शन 301 के तहत नई जांच शुरू कर दी है। सेक्शन 301 अमेरिका को उन देशों पर एकतरफा टैक्स बढ़ाने की शक्ति देता है, जो उसकी कंपनियों को नुकसान पहुंच रहे हो। पिछले महीने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति ट्रम्प के टैरिफ को अवैध बताने के बाद, प्रशासन अब नए कानूनी रास्तों से टैरिफ का दबाव वापस बनाने की तैयारी में है। अमेरिका उन देशों की जांच कर रहा है जो अपनी जरूरत से कहीं ज्यादा सामान बना रहे हैं और खपत न होने पर उस माल को सस्ते दामों पर अमेरिकी बाजारों में डंप कर रहे हैं। अमेरिका यह देखना चाहता है कि क्या ये देश जानबूझकर अपनी एक्सेस कैपेसिटी का इस्तेमाल करके अमेरिकी कंपनियों और वहां के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को चोट तो नहीं पहुंचा रहे हैं। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर के मुताबिक, इस जांच के कारण इस साल गर्मियों तक भारत, चीन, यूरोपीय संघ और मैक्सिको जैसे देशों पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। ट्रम्प प्रशासन ने कुल 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू की है। इनमें भारत, चीन, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे शामिल हैं। ट्रम्प टैरिफ लगाने के लिए प्रतिबद्ध जेमिसन ग्रीर ने साफ कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प टैरिफ लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे व्यापार घाटे को कम करने और अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बचाने के लिए हर संभव रास्ता और टूल अपनाएंगे। उन्होंने ट्रेडिंग पार्टनर्स को मौजूदा समझौतों का पालन करने की चेतावनी दी। 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया था। इसके बाद ट्रम्प ने 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का अस्थाई टैरिफ लगाया था। अब प्रशासन सेक्शन 301 का इस्तेमाल कर रहा है ताकि ट्रेडिंग पार्टनर्स पर टैरिफ का खतरा बरकरार रहे और उन्हें बातचीत की मेज पर लाया जा सके। सेक्शन 301 ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 का एक हिस्सा है। यह अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव को यह ताकत देता है कि अगर कोई देश अनुचित व्यापार व्यवहार करता है, तो अमेरिका उस पर जवाबी टैरिफ या अन्य प्रतिबंध लगा सकता है। भारत के लिए चिंता की बात 2024 में अमेरिका के साथ भारत का गुड्स ट्रेड सरप्लस 58,216 मिलियन डॉलर (5.37 लाख करोड़) था। ये 2025 में 45,801 मिलियन डॉलर (4.23 लाख करोड़) रह गया। इसमें कमी आई है फिर भी भारत उन 16 देशों की सूची में है जिनकी जांच होगी। अगर जांच में भारत की नीतियां अनुचित पाई गईं, तो भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लग सकता है। चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा सबसे ऊपर है। 2024 में चीन का ट्रेड सरप्लस 202,071 मिलियन डॉलर था, जो 2025 में बढक़र 295,515 मिलियन डॉलर हो गया। यानी एक साल में ही करीब 93,444 मिलियन डॉलर का बड़ा उछाल आया है। यूरोपीय संघ के साथ अमेरिका का घाटा 2025 में बढक़र 235,874 मिलियन डॉलर हो गया है। मैक्सिको के साथ भी घाटा 171,491 मिलियन डॉलर के स्तर पर है। ताइवान और वियतनाम जैसे देशों के घाटे में हालांकि कमी आई है, फिर भी वे जांच के घेरे में हैं। 15 अप्रैल तक मांगे गए हैं सुझाव 15 अप्रैल तक आम लोगों और कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद 5 मई के आसपास सार्वजनिक सुनवाई होगी। लक्ष्य यह है कि जुलाई में अस्थाई टैरिफ खत्म होने से पहले ही इस जांच के नतीजे और नए टैरिफ के प्रस्ताव तैयार कर लिए जाएं। ग्रीर ने बताया कि वे सेक्शन 301 के तहत एक और जांच शुरू कर रहे हैं, जिसका मकसद फोस्र्ड लेबर से बने सामानों के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना है। अमेरिका पहले ही उइगर फोस्र्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और दूसरे सामानों पर एक्शन ले चुका है। अब इस तरह की कार्रवाई दूसरे देशों पर भी की जा सकती है। अमेरिका चाहता है कि दूसरे देश भी बंधुआ मजदूरी या जबरन श्रम से बने सामानों पर बैन लगाएं। विनोद उपाध्याय / 12 मार्च, 2026