लेख
13-Mar-2026
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देश के कई हिस्सों में रसोई गैस को लेकर जिस तरह की स्थिति सामने आ रही है, उसने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। लोगों के पास ना तो रसोई गैस है ना केरोसिन तेल है और ना ही लकड़ी उपलब्ध हो रही है। कई स्थानों पर तो बिजली सप्लाई भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में घर में खाना बनाना सबसे मुश्किल काम हो गया है। एक ओर सरकार दावा कर रही है, देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में घंटों खड़े रहना पड़ रहा है। देश के सैकड़ो स्थान से इस बात के वीडियो और फोटो समाचार पत्रों, न्यूज़ चैनल्स और सोशल मीडिया में प्रदर्शित हो रहे हैं। कई स्थानों पर डीलर खुले तौर पर कह रहे हैं, उनके पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं है। पिछले कई दिनों से गैस की बुकिंग और सप्लाई बंद है। यह विरोधाभास केवल प्रशासनिक, नीतिगत और व्यवस्था की समस्या नहीं है वरन उन करोड़ों लोगों की समस्या है जिनके घर पर ना तो चाय बन पा रही है ना खाना बन पा रहा है। जो सरकार के दावों की हकीकत को उजागर कर रहा है। भारत में घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों—इंडियन आयल कारपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के माध्यम से की जाती है। इसके अलावा निजी गैस कंपनियां भी गैस सप्लाई करती हैं लेकिन सभी कंपनियों की गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। सरकार का तर्क है, इन कंपनियों के पास पर्याप्त भंडार है। वितरण प्रणाली सामान्य रूप से चल रही है, पर वास्तविकता में उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे है। 1800 से 2000 रुपए में एलपीजी का घरेलू गैस सिलेंडर कालाबाजारी से मिल रहा है। वही कमर्शियल गैस सिलेंडर 4000 रुपये तक में बिक रहा है। सरकार इसे वितरण तंत्र की गंभीर खामी बताकर पल्ला झाड़ रही है। जमीनी स्तर पर डीलरों का कहना है, उन्हें कंपनियों से समय पर पर्याप्त संख्या में सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। पोर्टल ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है। गैस डीलर भी जिस माध्यम से बुकिंग करते हैं उसका भी पोर्टल बार-बार या तो धीमा हो जाता है या बंद हो जाता है। जिसके कारण वह उपभोक्ताओं की मांग को पूरी नहीं कर पा रहे हैं। बुकिंग के बाद भी उपभोक्ताओं को कई दिनों तक सिलेंडर का इंतजार करना पड़ रहा है। जिसके कारण करोड़ों घर में खाना बनाना मुश्किल हो गया है। इससे सवाल उठता है, यदि उत्पादन और भंडारण पर्याप्त है, तो फिर गैस की आपूर्ति में बाधा क्यों है? इस समस्या से आम आदमी से लेकर होटल व्यवसाय से जुड़े हुए लोगों और शादी ब्याह के आयोजनों में लोगों को बड़ी परेशानी हो रही है। गैस के कारण मात्र असुविधा नहीं वरन गैस लूटने तक की घटनाएं सामने आ रही हैं। रसोई गैस आम परिवारों की बुनियादी आवश्यकता है। इसका कोई विकल्प भी उनके पास उपलब्ध नहीं है। शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों के करोड़ों परिवार एलपीजी गैस पर निर्भर हैं। ऐसे में गैस की आपूर्ति बाधित होने पर इसका सीधा असर करोड़ों लोगों के जीवनयापन और छोटे व्यवसायों पर पड़ा है। सरकार केवल बयान देने तक सीमित न रहे। सरकार और कार्यपालिका की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, वह गैस की आपूर्ति प्रणाली की वास्तविक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए युद्ध स्तरीय प्रयास करे। गैस की आपूर्ति को लेकर जमाखोरी, परिवहन या वितरण में गड़बड़ी है, तो उस पर तुरंत सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। गैस एजेंसियों और उपभोक्ताओं के बीच पारदर्शी एवं जवाबदेही के लिए संवाद जरूरी है, सार्वजनिक क्षेत्र में और मंदिर इत्यादि में जहां लंगर इत्यादि गरीबों के लिए चलाए जाते हैं वहां पर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के साथ होना चाहिए। यदि सरकार का दावा सही है, गैस की कमी नहीं है तो ऐसी स्थिति में जनता को सड़कों पर उतरने की नौबत क्यों आई है? इस प्रश्न का स्पष्ट और ईमानदार उत्तर देना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। गैस संकट का वास्तविक समाधान तभी हो सकता है, जब सभी पक्ष ईमानदारी के साथ वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आपस में सहयोग करें। गैस, पेट्रोल, डीजल अब सभी लोगों से नियमित रूप से जुड़ा हुआ एक ऐसा मामला है जिसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है और ना ही इसे झुठलाया जा सकता है। सभी पक्ष जितनी जल्दी हकीकत को समझ लेंगे, समस्या का समाधान उतनी ही जल्दी निकाल पाएंगे। ईएमएस / 13 मार्च 26