राज्य
13-Mar-2026


- सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मप्र महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष विभा पटेल ने कहा भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष विभा पटेल ने क्रीमी लेयर से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी अभ्यर्थी को क्रीमी लेयर में शामिल करने का निर्णय केवल उसके अभिभावकों की सैलरी के आधार पर नहीं किया जा सकता। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद ऐसे सभी लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण किया जाए। साथ ही ओबीसी प्रमाणपत्र बनाए जाने संबंधी आदेश ब्लॉक स्तर तक जारी किए जाएं और इसकी सूचना राजपत्र में प्रकाशित कराई जाए, ताकि ओबीसी वर्ग के क्रीमी लेयर से जुड़े लोगों को व्यवहारिक दिक्कतों का सामना न करना पड़े। विभा पटेल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि क्रीमी लेयर का निर्धारण करते समय केवल आय को आधार नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए अभिभावकों के पद और सेवा श्रेणी जैसे मानकों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह मामला उन अभ्यर्थियों से जुड़ा था जो यूपीएससी की परीक्षा में सफल हुए थे। उनके माता-पिता सार्वजनिक उपक्रमों, बैंकों या अन्य संस्थानों में कार्यरत थे। सरकार ने वर्ष 2004 के एक स्पष्टीकरण पत्र का हवाला देते हुए उनकी सैलरी को आय में जोड़ दिया था। इसके चलते कई सफल उम्मीदवारों को गलत तरीके से क्रीमी लेयर में शामिल कर दिया गया और वे नौकरी से वंचित रह गए। विभा पटेल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इंदिरा साहनी मामले के बाद वर्ष 1993 में जारी सरकारी आदेश का भी उल्लेख किया है। इस आदेश में क्रीमी लेयर तय करने के लिए अभिभावकों के पद को प्रमुख आधार माना गया है और सैलरी या खेती से होने वाली आय को इसमें शामिल नहीं किया जाता। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2004 का स्पष्टीकरण पत्र मूल नीति में बदलाव नहीं कर सकता। साथ ही सरकारी कर्मचारियों और सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू) के कर्मचारियों के बीच भेदभाव करना समानता के अधिकार के खिलाफ है। विभा पटेल के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि छह महीने के भीतर प्रभावित उम्मीदवारों के मामलों पर पुनर्विचार किया जाए। आवश्यकता पडऩे पर उनके लिए अलग से पद सृजित करने की भी व्यवस्था की जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस निर्णय से ओबीसी वर्ग के योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिलेगा और भविष्य में क्रीमी लेयर निर्धारण की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और न्यायसंगत बनेगी। विनोद / 13 मार्च 26