राज्य
13-Mar-2026


- सीएम डॉ. मोहन यादव फिर बदलेंगे शिवराज का एक और फैसला भोपाल (ईएमएस)। सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की लेटलतीफी और कामकाज में ढिलाई को लेकर सरकार सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। सीएम मोहन यादव ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि कार्यालयीन समय के पालन और कार्यसंस्कृति में सुधार नहीं हुआ तो प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में फिर से छह दिन का कार्य सप्ताह (सिक्स-डे वीक) लागू किया जा सकता है। इससे आम नागरिकों को दफ्तरों में अपने काम के लिए अधिक समय मिल सकेगा। माना जा रहा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक और फैसला मुख्यमंत्री मोहन यादव पलटने जा रहे हैं। प्रदेश में कोरोना महामारी के दौरान सरकारी कर्मचारियों के लिए कामकाज का पैटर्न बदला गया था। पहले जहां सप्ताह में छह दिन कार्यालय खुलते थे, वहीं बाद में इसे पांच दिन का कार्य सप्ताह कर दिया गया। लेकिन समय के साथ लगातार यह शिकायत सामने आती रही कि कई कार्यालयों में कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचते और कामकाज प्रभावित होता है। हाल ही में मंत्रालय और अन्य विभागों में सुबह समय पर कर्मचारियों की उपस्थिति की स्थिति देखने के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारियों की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो पांच दिन के कार्य सप्ताह की व्यवस्था समाप्त कर फिर से छह दिन का पुराना सिस्टम लागू किया जा सकता है। कोरोना के बाद बदला था कामकाज का ढांचा कोरोना संकट के दौरान संक्रमण की स्थिति को देखते हुए सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए कार्य व्यवस्था में बदलाव किया था। उस समय कर्मचारियों की संख्या सीमित रखकर काम कराया जा रहा था और बाद में सप्ताह में छह दिन के स्थान पर पांच दिन काम करने का निर्णय लिया गया। अब जबकि महामारी का खतरा समाप्त हो चुका है और जनजीवन सामान्य हो गया है, ऐसे में कामकाज की पुरानी व्यवस्था पर लौटने पर विचार किया जा रहा है। बाहर से आने वाले लोग होते हैं परेशान मंत्रालय और बड़े विभागों में काम कराने के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों से नागरिक भोपाल आते हैं। कई बार उन्हें सोमवार को ही अधिकारियों से मुलाकात का समय मिलता है। ऐसे में यदि शुक्रवार को काम पूरा नहीं हो पाता तो लोगों को दो दिन तक राजधानी में रुकना पड़ता है। इससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है। कई लोगों की शिकायत रहती है कि मंत्रालय में सोमवार को सुबह कर्मचारी समय पर उपलब्ध नहीं होते और शुक्रवार को दोपहर बाद कामकाज लगभग बंद हो जाता है। इससे दूर-दराज से आने वाले नागरिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लंच ब्रेक के बाद भी घटती है मौजूदगी सरकारी दफ्तरों में लंबे लंच ब्रेक और बीच-बीच में चाय-नाश्ते के कारण भी काम प्रभावित होने की शिकायतें मिलती रही हैं। कई बार देखा गया है कि दोपहर के भोजन के बाद कर्मचारियों की उपस्थिति कम हो जाती है और आम लोगों को काम के लिए इंतजार करना पड़ता है।।सरकार का मानना है कि यदि सप्ताह में छह दिन कार्यालय खुलेंगे तो नागरिकों को काम कराने के लिए अधिक समय मिलेगा और प्रशासनिक कामकाज की गति भी बढ़ेगी। इसी कारण कार्यालयीन अनुशासन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। समयपालन पर बढ़ेगी निगरानी सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि कार्यालयों में समयपालन सुनिश्चित करने के लिए आकस्मिक निरीक्षण की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली पर नियमित निगरानी रखें। सरकार का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में ऐसी व्यवस्था स्थापित करना है, जिससे आम नागरिकों को बिना अनावश्यक प्रतीक्षा के अपने काम कराने की सुविधा मिल सके। यदि कर्मचारियों की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ। तो आने वाले समय में प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में फिर से छह दिन का कार्य सप्ताह लागू किया जा सकता है। विनोद / 13 मार्च 26