देहरादून (ईएमएस)। पशु चिकित्सा रोगों के त्वरित निदान में नये तकनीको के प्रवेश से बदलते परिदृश्य के दृष्टिगत पशुपालन विभाग के फार्मेसी अधिकारियो के कौशल विकास में वृद्धि करने के लिए उत्तराखण्ड राज्य पशु चिकित्सा परिषद, देहरादून तक पशुपालन विभाग में कार्यरत तीस फार्मेसी अधिकारियों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम रोग निदान और प्रकोप प्रबंधन के लिए प्रयोगशाला तकनीकें का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम का शुभारम्भ निदेशक, पशुपालन विभाग, देहरादून डा. उदय शंकर, व अपर निदेशक, पशुपालन विभाग, गढ़वाल मण्डल, पौडी डा. भूपेन्द्र सिह जगपागी तथा अध्यक्ष, उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद, देहरादून डा. कैलाश उनियाल द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इस अवसर पर डा. सतीश जोशी, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग द्वारा प्रतिभागियों को उक्त प्रशिक्षण के विषय के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान प्रशिक्षण हेतु विषय विशेषज्ञ के रूप में डा. आलोक खण्डूरी, पशुचिकित्सा अधिकारी, गण्डलीय प्रयोगशाला, पौडी तथा डा. प्रीति पंत, वरिष्ठ पशुचिकित्साधिकारी रोग निदान प्रयोगशाला, पशुलोक, ऋषिकेश द्वारा पशुओं में होने वाली बीमारियों के त्वरित निदान हेतु नवीनतम तकनीकों पर विस्तार से बताया गया। इस अवसर पर डा. प्रलयकर नाथ, रजिस्ट्रार, उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद द्वारा अवगत कराया गया कि पशुपालन विभाग के फार्मेसी अधिकारियों के कौशल विकास हेतु विभाग द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे है। इस अवसर पर डा. उदय शकर, निदेशक, पशुपालन विभाग, देहरादून द्वारा प्रतिभागी फार्मेसी अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग करते हुए पशुपालको को बेहतर पशुचिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराए। इस दौरान डा. कैलाश उनियाल, अध्यक्ष, उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद, देहरादून द्वारा गॉडल पशुचिकित्साल्यों में पशु रोग निदान में उक्त प्रशिक्षण की महत्वता पर विशेष बल दिया गया। इस अवसर पर डा. उदय शंकर गुप्ता, उप रजिस्ट्रार उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद, देहरादून भी उपस्थित रहे। शैलेन्द्र नेगी/ईएमएस/13 मार्च 2026