वैश्विक परिपेक्ष में आज विश्व ऐसे दौर से गुजर रही है।जहाँ युद्ध,ऊर्जा संकट,आपूर्ति शृंखला की अस्थिरता और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति को नए सिरे से परिभाषित करना शुरू कर दिया है। ऐसे समय में भारत सरकार द्वारा आयोजित अंतर–मंत्रालयी प्रेस कॉन्फ्रेंस केवल प्रशासनिक जानकारी साझा करने का मंच नहीं थी,बल्कि यह उस व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि का संकेत भी थी।जिसके माध्यम से भारत बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए एक संतुलित और जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका को स्पष्ट कर रहा है।विदेश,पेट्रोलियम, वाणिज्य और ऊर्जा से जुड़े मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने वैश्विक युद्ध परिस्थितियों,ऊर्जा बाजार की अनिश्चितताओं, अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और भारत की दीर्घकालिक रणनीति पर विस्तार से जानकारी दी।यह स्पष्ट किया गया कि वर्तमान समय में वैश्विक राजनीति का केंद्र केवल सैन्य शक्ति नहीं रहा,बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति शृंखला, प्रौद्योगिकी और बहुपक्षीय कूटनीति भी उतने ही महत्वपूर्ण कारक बन चुके हैं। आज दुनिया जिस सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही है,युद्ध की बढ़ती विभीषिका।विशेष रूप से रूस - यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है।फरवरी 2022 में शुरू हुआ यह संघर्ष अब केवल दो देशों के बीच सीमित युद्ध नहीं रह गया,बल्कि उसने ऊर्जा बाजार, खाद्यान्न आपूर्ति और वैश्विक व्यापार मार्गों को प्रभावित किया है। यूरोप में गैस संकट पैदा हुआ, अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया और कई देशों की मुद्रास्फीति दरें तेजी से बढ़ीं। विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार इस युद्ध के कारण वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। भारत पर भी इन परिस्थितियों का अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा।भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है और प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा भी विदेशों से आती है।ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की अस्थिरता का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था,परिवहन लागत और औद्योगिक उत्पादन पर पड़ सकता है। यही कारण है कि भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को अपनी राष्ट्रीय नीति के प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित किया है।भारत की ऊर्जा रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू विविध स्रोतों से आयात सुनिश्चित करना है।पिछले कुछ वर्षों में भारत ने तेल आयात के अपने स्रोतों का विस्तार किया है और विभिन्न देशों के साथ ऊर्जा सहयोग को मजबूत किया है।इस संदर्भ में रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल की खरीद ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 2021 में जहाँ भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बहुत कम थी,वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर लगभग 35 प्रतिशत के आसपास पहुँच गई। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार की ऊँची कीमतों से काफी राहत मिली। इसी प्रकार पश्चिम एशिया के देशों के साथ भी भारत के ऊर्जा संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।सऊदी अरब,संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे देशों के साथ दीर्घकालिक तेल और गैस आपूर्ति समझौते भारत की ऊर्जा नीति की स्थिरता को सुनिश्चित करते हैं। कतर भारत को तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और भारत की गैस आधारित ऊर्जा संरचना में उसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ भारत स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।सौर ऊर्जा,पवन ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है।भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता स्थापित करना है।इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ रहा है और भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाने की दिशा में अग्रसर है।विदेश नीति के स्तर पर भारत ने जिस संतुलित दृष्टिकोण को अपनाया है, वह वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में विशेष महत्व रखता है।रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान भारत ने किसी एक पक्ष का खुला समर्थन करने के बजाय संवाद और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर भारत ने बार-बार यह कहा कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता और सभी पक्षों को बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशना चाहिए।यह संतुलित नीति भारत को पश्चिमी देशों और रूस दोनों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने की क्षमता देती है।एक ओर भारत के रणनीतिक संबंध अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ लगातार मजबूत हो रहे हैं,वहीं दूसरी ओर रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा सहयोग भी जारी है।यही बहु-आयामी कूटनीति आज की बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है।वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है।विशेष रूप से BRICS समूह में भारत की सक्रियता इस दिशा में महत्वपूर्ण है। ब्रिक्स - जिसमें ब्राजील, रूस, भारत,चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं -आज वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को मजबूत करने वाला प्रमुख मंच बन चुका है। इस समूह का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को अधिक संतुलित और समावेशी बनाना है।ब्रिक्स देशों की कुल आबादी विश्व की लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इनकी हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।हाल के वर्षों में इस समूह ने नई विकास बैंक के माध्यम से विकासशील देशों में अवसंरचना परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने की पहल भी की है।भारत इस मंच का उपयोग वैश्विक दक्षिण की विकास आवश्यकताओं को अंतरराष्ट्रीय नीति विमर्श के केंद्र में लाने के लिए कर रहा है। अंतर–मंत्रालयी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत की राष्ट्रीय नीति केवल तत्काल संकटों से निपटने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका उद्देश्य दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करना है।ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार,रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की क्षमता बढ़ाने, गैस पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश जैसे कदम इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को भी मजबूत किया है।देश में विशाखा पत्तनम,मंगलुरु और पाडुर जैसे स्थानों पर भूमिगत तेल भंडारण सुविधाएँ विकसित की गई हैं,जो आपातकालीन परिस्थितियों में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आज जब दुनिया अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है,तब भारत की नीति का मूल आधार संतुलन, व्यावहारिकता और दीर्घकालिक दृष्टि है।युद्ध की विभीषिका,ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता के बीच भारत ने यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए भी वैश्विक सहयोग और शांति को प्राथमिकता दी जा सकती है। अंतर–मंत्रालयी प्रेस कॉन्फ्रेंस का संदेश भी यही था कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत केवल एक दर्शक नहीं है, बल्कि वह सक्रिय भागीदार के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। ऊर्जा सुरक्षा से लेकर वैश्विक कूटनीति तक,भारत एक ऐसी रणनीति पर आगे बढ़ रहा है जिसमें राष्ट्रीय विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग दोनों के लिए समान स्थान है।यह वही दृष्टि है जो आने वाले वर्षों में भारत को केवल एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था ही नहीं,बल्कि एक स्थिर,विश्वसनीय और जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर सकती है। ईएमएस/14मार्च2026