माध्यमिक शिक्षा मंडल एमपी बोर्ड के नाम और लोगो का प्रयोक कर देता था झांसा - ऑनलाइन गेमिंग का शौकीन है आरोपी, मनी ट्रेल से बचने ठगी की रकम गेमिंग वॉलेट में कराता था ट्रांसफर भोपाल(ईएमएस)। क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने माध्यमिक शिक्षा मंडल एमपी बोर्ड के नाम और लोगो का दुरुपयोग कर टेलीग्राम के जरिये 10-12वीं परीक्षा के फर्जी पेपर बेचकर छात्रो से ठगी करने के मामले में एक आरोपी को राजगढ़ जिले के खुजनेर से गिरफ्तार किया है। आरोपी टेलीग्राम पर फर्जी ग्रुप बनाकर 10वीं और 12वीं के प्रश्नपत्र देने का झांसा देता और छात्रों से रकम ऐंठता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी टेलीग्राम एप पर एमपी बोर्ड पेपर लीक के नाम से ग्रुप बनाकर छात्रों को जोड़ता था। इस ग्रुप का यूजरनेम एमपीबोर्डपेपरलीक नाम से था। आरोपी छात्रों को यह भरोसा दिलाता था कि उसके पास एमपी बोर्ड की वार्षिक परीक्षा के असली प्रश्नपत्र मौजूद है, और पैसे देने पर उन्हें परीक्षा से पहले उपलब्ध करा दिए जाएंगे। इसके बाद आरोपी 10वीं और 12वीं के छात्रों से 500 से 1 हजार रुपये तक वसूलता था। पैसे मिलने के बाद वह छात्रों को प्राइवेट टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ने का लालच देता था। रकम फर्जी खातों में क्यूआर कोड के माध्यम से ट्रांसफर कराई जाती थी। हालांकि पैसे मिलने के बाद आरोपी छात्रों को असली पेपर देने के बजाय सैंपल पेपर भेजकर गुमराह कर देता था। पुलिस ने मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर क्राइम ब्रांच की टीम ने तकनीकी विश्लेषण कर आरोपी अरुण मालवीय (22) पिता घनश्याम मालवीय निवासी मालवीय मोहल्ला खुजनेर, राजगढ़ से गिरफ्तार कर लिया। - छात्रों से फर्जी खातों में डलवाता था पैसे आरोपी अरुण मालवीय से पूछताछ में सामने आया कि वह टेलीग्राम पर ग्रुप बनाकर छात्रों को पेपर लीक का झांसा देता था, और मनी ट्रेल से बचने ठगी की रकम फर्जी खातों में पैसे डलवाता और फिर गेमिंग वॉलेट में ट्रांसफर कराता था। पुलिस ने आरोपी के पास से मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड भी जब्त किए है। - खुद 11वीं फेल है आरोपी लगाता है फलो का ठेला ऑनलाइन गेमिंग का है शौकीन पुलिस ने बताया की ठगी करने वाला आरोपी अरुण मालवीय 11वीं फेल है, और खुजनेर में फल का ठेला लगाता है। उसने टेलीग्राम पर चैनल बनाकर छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को जोड़ा। साथ ही बोर्ड परीक्षा से पहले उन्हें पेपर उपलब्ध करवाने का दावा किया। और बाद में उन्हें पूर्व के वर्षों के प्रश्नपत्र और सॉल्वड पेपर थमा दिए। परीक्षा के दौरान आरोपी ने 50 से ज्यादा लोगों को फर्जी पेपर बेचने की बात स्वीकारी है। वही उसने यह भी खुलासा किया की वह ऑनलाइन गेमिंग का शौकीन है। और पुलिस जांच में मनी ट्रेल से बचने के लिए वह साइबर ठगी की राशि अपने गेमिंग वॉलेट में ऑनलाइन ट्रांसफर करवाता था। इसके बाद वह अपने दोस्तों-रिश्तेदारों या कियोस्क संचालक के खाते में रुपये डालकर उनसे नकद रकम लेता था। अब तक वह कई लोगो से करीब 20 हजार से ज्यादा की ठगी कर चुका है। जिसमें से काफी रकम उसने गेमिंग में उड़ाई है। जुनेद / 14 मार्च