- गैस एंजेसियों के बाहर लगी लंबी-लंबी लाईन जबलपुर, (ईएमएस)। जिला प्रशासन भले ही एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रहा हो, लेकिन शहर की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जबलपुर की अलग-अलग गैस एजेंसियों के बाहर सुबह 8 बजे से लेकर रात 1 बजे तक सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। ईरान–इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच जैसे-जैसे खाड़ी क्षेत्र में हालात गंभीर होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे शहर में घबराहट बढ़ती जा रही है। परिणामस्वरूप लोग एहतियात के तौर पर गैस सिलेंडर की व्यवस्था करने में जुट गए हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब जबलपुर की रसोई तक महसूस किया जा रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों की वैश्विक सप्लाई और शिपिंग मार्गों पर संभावित असर की खबरों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। यही कारण है कि घरेलू गैस की मांग अचानक बढ़ गई है, जबकि कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से होटल, रेस्टोरेंट और केटरिंग व्यवसाय पर भी दबाव साफ नजर आ रहा है। सुबह से देर रात तक कतारें … शहर के कई इलाकों में गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की भीड़ देखी जा रही है। कई लोग खाली सिलेंडर लेकर सुबह से लाइन में खड़े हैं। कुछ स्थानों पर स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि लोगों को टोकन सिस्टम लागू करना पड़ा। घरेलू उपभोक्ता रवि पांडे ने बताया, “पांच दिन से गैस के लिए परेशान हूं। ऑनलाइन बुकिंग की, ओटीपी भी आया, लेकिन डिलीवरी नहीं हुई। रोज ऑफिस से छुट्टी लेकर एजेंसी आना पड़ रहा है।” वहीं सुशील नामक उपभोक्ता ने कहा, “छह दिन से बुकिंग की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन नंबर ही नहीं लग रहा। समझ नहीं आ रहा कि गैस कब मिलेगी।” कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें डर है कि यदि हालात और बिगड़े तो गैस मिलना और मुश्किल हो जाएगा, इसलिए वे पहले से इंतजाम करना चाहते हैं। बुकिंग सिस्टम पर बढ़ता दबाव … टोल-फ्री और मोबाइल बुकिंग नंबरों पर कॉल नहीं लगने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। ऑनलाइन पोर्टल और ऐप पर भी सर्वर स्लो होने की बात सामने आ रही है। एजेंसी संचालकों के मुताबिक, सामान्य दिनों की तुलना में बुकिंग में अचानक 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि घरेलू गैस का स्टॉक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन अचानक बढ़ी मांग के कारण वितरण व्यवस्था प्रभावित हुई है। कई उपभोक्ता अतिरिक्त सिलेंडर लेने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे कृत्रिम दबाव बन रहा है। होटल उद्योग ढहने की कगार पर … कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई में रुकावट का असर शहर के होटल और रेस्टोरेंट पर साफ दिखाई दे रहा है। कई होटलों ने वैकल्पिक ईंधन का उपयोग शुरू कर दिया है। इंडक्शन कुकर, डीजल भट्टी और अन्य साधनों से खाना बनाया जा रहा है। शादी सीजन होने के कारण केटरर्स की चिंता और बढ़ गई है। आयोजनकर्ताओं को मेन्यू सीमित करने या वैकल्पिक व्यवस्था करने पर विचार करना पड़ रहा है। होटल संचालकों का कहना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो खाने-पीने की वस्तुओं के दाम भी प्रभावित हो सकते हैं। प्रशासन अलर्ट मोड पर … स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने निगरानी तेज कर दी है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने संबंधित विभागों और गैस एजेंसी संचालकों के साथ बैठक कर वितरण व्यवस्था की समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कालाबाजारी, जमाखोरी और कृत्रिम संकट पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घरेलू गैस की पर्याप्त उपलब्धता है और उपभोक्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है। साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही सिलेंडर बुक करें। पैनिंग बायिंग रोकने की आवश्यकता… ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। हालांकि फिलहाल स्थानीय स्तर पर सप्लाई पूरी तरह बाधित नहीं है, लेकिन मनोवैज्ञानिक दबाव और पैनिक बायिंग से स्थिति असामान्य हो रही है। फिलहाल प्रशासन हालात सामान्य बनाए रखने की कोशिश में जुटा है, लेकिन शहर की सड़कों पर लगी गैस सिलेंडरों की कतारें इस बात का संकेत दे रही हैं कि जंग की आंच अब जबलपुर की रसोई तक पहुंच चुकी है। सुनील साहू / शहबाज / 14 मार्च 2026