क्षेत्रीय
14-Mar-2026
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- आधुनिक आईटी युग में एक कागजी रिपोर्ट को लैब से अदालत तक पहुंचने में 11 महीने लगना दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य - हाईकोर्ट - एमपीएसईडीसी के प्रबंध निदेशक, सीएफएसएल के निदेशक, और अन्य आईटी विशेषज्ञों को किया तलब इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस संजीव एस. कलगांवकर की एकल पीठ ने फॉरेंसिक रिपोर्ट के आवश्यकता से भी कहीं अधिक समय तक लंबित रहने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई दौरान नाराजगी जताते इसे आपराधिक न्याय प्रणाली की गंभीर प्रक्रियात्मक विफलता बता संबंधित अधिकारियों को तलब किया है। मामला आरोपी मोहम्मद अतीक की जमानत याचिका से संबंधित है जिसमें सुनवाई दौरान यह तथ्य सामने आया कि स्वापक पदार्थ (नारकोटिक कंट्राबैंड) की रासायनिक विश्लेषण रिपोर्ट 15 अप्रैल 2025 को तैयार हो गई थी, लेकिन यह रिपोर्ट करीब 11 माह बाद 9 मार्च 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय, रतलाम पहुंची। जिसके बाद 10 मार्च को यह रिपोर्ट विशेष न्यायाधीश के समक्ष पेश की गई। तथ्य सामने आने के बाद कोर्ट ने कहा कि इस देरी के कारण न सिर्फ जमानत याचिका पर सुनवाई प्रभावित हुई, बल्कि मुकदमे (ट्रायल) में भी अनावश्यक विलंब हुआ। याचिका सुनवाई दौरान जस्टिस कलगांवकर ने टिप्पणी की कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। आईटी के इस आधुनिक युग में भी एक कागजी रिपोर्ट को लैब से अदालत तक पहुंचने में 11 महीने लगना दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है। कोर्ट ने कहा कि नवंबर 2025 और जनवरी 2026 में पुलिस महानिदेशक और अन्य अधिकारियों को डिजिटल माध्यमों के उपयोग के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, ताकि रिपोर्ट तेजी से कोर्ट पहुंच सकें। अधिकारियों ने निर्देशों पर ध्यान नहीं दिया। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट अगली सुनवाई पर म.प्र. इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक, सीएफएसएल भोपाल के निदेशक, और अन्य आईटी विशेषज्ञों को वीसी के जरिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश देते सुनवाई की अगली तारीख 18 मार्च 2026 नियत की। आनंद पुरोहित/ 14 मार्च 2026