ग्वालियर ( ईएमएस ) । रुस्तमजी इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (RJIT), बीएसफ अकादमी ग्वालियर में IEEE मध्य प्रदेश सेक्शन के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय IEEE Madhya Pradesh Section Conference (MPCON-2026) का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रख्यात शिक्षाविद एवं प्रसिद्ध तकनीकी पुस्तकों के लेखक प्रो. ई. बालागुरुसामी, पूर्व कुलपति, अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई रहे। उन्होंने कहा कि अगले 20 वर्षों में भारत को विकसित राष्ट्र बनाना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए रचनात्मक शिक्षा की आवश्यकता है और देश को केवल इंजीनियरिंग डिग्रीधारी नहीं बल्कि सच्चे इंजीनियर चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षक, इंजीनियर और वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इस अवसर पर दीपक माथुर, वाइस प्रेसिडेंट (MGA), IEEE, USA ने बताया कि IEEE विश्व का सबसे बड़ा तकनीकी संगठन है, जिसके पाँच लाख से अधिक सदस्य 190 से अधिक देशों में कार्यरत हैं और यह 10 क्षेत्रों में विभाजित है। उन्होंने कहा कि भारत IEEE की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और तकनीकी नवाचार में तेजी से आगे बढ़ रहा है। डॉ. पुलक एम. पांडे, प्रोफेसर, IIT दिल्ली ने कहा कि वर्तमान समय कोर इंजीनियरिंग में इलेक्ट्रॉनिक्स और इंटेलिजेंट सिस्टम के एकीकरण का युग है। उन्होंने कहा कि आज की औद्योगिक क्रांति की सबसे बड़ी आवश्यकता बुद्धिमान (इंटेलिजेंट) प्रणालियों का विकास है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष दीक्षित, चेयर, IEEE Madhya Pradesh Section ने किया और IEEE की विभिन्न तकनीकी सोसाइटियों की भूमिका तथा इंजीनियरिंग समुदाय के प्रति उनकी जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। संस्थान के प्राचार्य डॉ. प्रशांत कुमार जैन ने अपने संबोधन में RJIT तथा BSF Academy में उपलब्ध शैक्षणिक एवं तकनीकी अवसंरचना की जानकारी देते हुए बताया कि यह देश का एक अनूठा इंजीनियरिंग संस्थान है, जिसका संचालन अर्धसैनिक बल द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वैश्विक स्तर के आयोजनों से विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को आधुनिक तकनीकी विचारों और अनुसंधान गतिविधियों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलता है। वहीं श्री मनीष चंद्र, कमांडेंट CSMT एवं ओएसडी–RJIT ने कहा कि MPCON-2026 जैसे अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं। इससे उन्हें वैश्विक स्तर के विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर मिलता है तथा नवीन तकनीकी शोधों से परिचित होने का मंच प्राप्त होता है। कॉन्फ्रेंस के जनरल चेयर डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने इसकी रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस कॉन्फ्रेंस के लिए लगभग 950 शोध-पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से करीब 250 शोध-पत्र चयनित किए गए हैं। ये शोध-पत्र दो दिनों में विभिन्न तकनीकी सत्रों में ऑफलाइन तथा हाइब्रिड मोड में प्रस्तुत किए जाएंगे। कार्यक्रम के अंत में डॉ. नमिता सक्सेना ने आभार व्यक्त किया। कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और उद्योगों से जुड़े अनेक शोधकर्ता एवं विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं, जिससे यह आयोजन तकनीकी सहयोग और नवाचार को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।