तेहरान,(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अब लड़ाई सिर्फ मिसाइलों और ड्रोन तक सीमित नहीं रही, बल्कि तेल सुविधाओं पर सीधे हमले की धमकियां दी जा रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोकी गई या बाधित हुई, तो ईरान के सबसे अहम तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप की तेल संरचना को निशाना बनाया जा सकता है। इसके जवाब में ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा है कि अगर उसके तेल ढांचे पर हमला हुआ, तो वह अमेरिका से जुड़ी तेल और ऊर्जा सुविधाओं को राख के ढेर में बदल देगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने 13 मार्च को खर्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों पर हमला किया, लेकिन अभी तक वहां के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नहीं छुआ है। ट्रंप ने कहा कि यह जानबूझकर किया गया, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर समुद्री रास्तों की “फ्री और सेफ पैसेज” प्रभावित हुई, तो तेल ढांचे पर हमला करने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाएगा। खर्ग द्वीप ईरान के लिए सिर्फ एक द्वीप नहीं, बल्कि उसकी तेल अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के करीब 90 फीसदी कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप से होता है। वहां पाइपलाइन, स्टोरेज और लोडिंग नेटवर्क को नुकसान पहुंचना वैश्विक बाजार से करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन तेल हटाने जैसा बड़ा झटका हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद इस समुद्री मार्ग से यातायात बुरी तरह सिमटा है, और एक रिपोर्ट में कहा गया कि थ्रूपुट में 97 फीसदी तक गिरावट आई। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यह भी कहा कि ईरान द्वारा जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने का स्पष्ट सबूत नहीं मिला, लेकिन समुद्री जोखिम और तनाव बेहद ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े ऊर्जा ढांचों को निशाना बनाने की धमकी दोहराई है। यह सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि खाड़ी देशों, खासकर उन देशों के लिए गंभीर चेतावनी है जहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी है या अमेरिकी ऊर्जा हित जुड़े हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने यूएई में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर चेतावनी दी है, और क्षेत्रीय तनाव अब सिर्फ ईरान-अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार, शिपिंग, बीमा लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। खर्ग द्वीप पर हमला और होर्मुज में अवरोध इन दोनों में से कोई भी कदम दुनिया भर में तेल कीमतों को और उछाल सकता है। इसलिए यह टकराव अब सिर्फ सैन्य युद्ध नहीं, बल्कि तेल, व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन का युद्ध बनता जा रहा है। सिराज/ईएमएस 15मार्च26 --------------------------------