जयपुर (ईएमएस)। राष्ट्रीय अभिलेखागार, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित भारत की विश्व विरासत राजस्थान विषयक 10 दिवसीय लोक संस्कृति प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के केंद्रीय कार्यालय परिसर में किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शेखावत ने प्रदर्शनी का लोकार्पण करते हुए कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को संरक्षित एवं सुरक्षित रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को सुरक्षित रखेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली इतिहास और संस्कृति से परिचित करा सकेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक धरोहरें केवल ऐतिहासिक महत्व की नहीं हैं, बल्कि वे हमारी पहचान, परंपरा और जीवन मूल्यों की प्रतीक भी हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की भूमि सदियों से वीरता, त्याग, कला, स्थापत्य और लोक परंपराओं की समृद्ध धरोहर को संजोए हुए है। यहाँ की लोक संस्कृति, ऐतिहासिक स्मारक, मंदिर, दुर्ग, चित्रकला, पांडुलिपियाँ और लोक परंपराएँ न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के लिए आकर्षण का केंद्र रही हैं।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत सरकार विकास भी, विरासत भी की भावना के साथ कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य यह है कि एक ओर देश में आधुनिक विकास और आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ किया जाए, वहीं दूसरी ओर देश की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों, ऐतिहासिक स्थलों और परंपराओं का संरक्षण एवं संवर्धन भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि देश की पांडुलिपियों, अभिलेखों और सांस्कृतिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहलें की जा रही हैं।श्री शेखावत ने जय नारायण व्यास विश्विद्यालय से जुड़ी अपनी पुरानी स्मृतियों को भी साझा किया और कहा कि यह विश्वविद्यालय लंबे समय से शिक्षा, शोध और सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे समाज और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने राजस्थान के इतिहास, कला और लोक संस्कृति के वैभव का उल्लेख करते हुए कहा कि मेवाड़, मारवाड़ और शेखावाटी जैसे क्षेत्र अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के कारण देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। अशोक शर्मा/ 4 बजे/15 मार्च 2026