भोपाल(ईएमएस)। एम्स भोपाल जनस्वास्थ्य जागरूकता और सुरक्षित चिकित्सा सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में संस्थान के औषधि विज्ञान विभाग ने दवाओं और चिकित्सा उपकरणों से होने वाले दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए एक विशेष अभियान आयोजित किया। यह कार्यक्रम सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग के सहयोग से रायसेन जिला के साँची स्थित सिविल अस्पताल (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) में आयोजित किया गया। इस अभियान का उद्देश्य आम नागरिकों को यह समझाना था कि दवाओं या चिकित्सा उपकरणों के उपयोग के दौरान यदि कोई दुष्प्रभाव या समस्या दिखाई दे, तो उसकी जानकारी संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाना बहुत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान दीपा चौधरी (फार्माकोविजिलेंस एसोसिएट) और आकाश ठाकुर (मटेरियोविजिलेंस एसोसिएट) ने प्रतिभागियों को दवाओं और चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग के महत्व के बारे में सरल तरीके से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आम नागरिक ऐसी घटनाओं की जानकारी कई माध्यमों से दे सकते हैं, जैसे फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-180-3024, मोबाइल ऐप और उपभोक्ता रिपोर्टिंग फॉर्म। डॉ. अश्विन बाबू (जूनियर रेजिडेंट, औषधि विज्ञान विभाग) ने भी समय पर दुष्प्रभावों की जानकारी देने के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम में लोगों को दवाओं के संभावित दुष्प्रभावों, जिन्हें एडवर्स ड्रग रिएक्शन कहा जाता है, और चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी संभावित समस्याओं के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही दवाओं और चिकित्सा उपकरणों का सुरक्षित उपयोग कैसे किया जाए, इस बारे में संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए, ताकि लोग इन बातों को आसानी से समझ सकें। गौरतलब है कि एम्स भोपाल का औषधि विज्ञान विभाग भारत सरकार के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम और मटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम के अंतर्गत मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सेंटर, मेडिकल डिवाइस एडवर्स इवेंट मॉनिटरिंग सेंटर तथा क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है और दवाओं तथा चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा से संबंधित निगरानी और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हरि प्रसाद पाल / 15 मार्च, 2026