ज्योतिर्मठ (ईएमएस)। उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र ज्योतिर्मठ में ‘‘फूलदेई’’ पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। क्षेत्र के डांडो गांव, सुनील, नोग, नरसिंह मंदिर, सिंहधार, रवि ग्राम, परसारी, मनौटी, बड़गांव सहित पैनखंडा क्षेत्र में आज इस प्रकृति को समर्पित लोक पर्व की धूम रही। उत्तराखंड की अनूठी लोक परंपरा का प्रतीक फूलदेई पर्व रविवार को चमोली जनपद के सीमांत क्षेत्र ज्योर्तिमठ से सटे नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया। जिसमें नन्हे-मुन्नें नौनिहाल बच्चों ने अपने हाथों में छोटी-छोटी रिंगाल की टोकरियां थामे घर-घर जाकर प्रातः काल से ही हर आंगन में बुरांस सहित फ्यूली आदि के फूल बिखेरे। साथ ही प्रकृति माता से सुख-शांति खुशहाली और समृद्धि की प्रार्थना की। बता दें कि फूलदेई प्रकृति और लोकपरंपराओं से जुड़ा पर्व है, जिसे उत्तराखंड के कुमाऊँ और गढ़वाल दोनों अंचलों में मनाया जाता है। यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन और प्रकृति की नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। चैत्र मास की संक्रांति के दिन छोटे-छोटे बच्चे घर-घर जाकर दहलीज पर बुरांश, प्योंली और अन्य बसन्त में खिले फूलों अर्पित करते हैं तथा सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस दौरान वे पारंपरिक गीत गाते हैं और घरों से दक्षिणा प्राप्त करते हैं। फूलदेई न केवल प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देता है, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत बनाता है। शैलेन्द्र नेगी/ईएमएस/15 मार्च 2026