बिहार-ओडिशा और हरियाणा में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स नई दिल्ली(ईएमएस)। राज्यसभा की 11 सीटों के लिए सोमवार को होने वाले मतदान से ठीक पहले बिहार, हरियाणा और ओडिशा में सियासी हलचल तेज हो गई है। संभावित क्रॉस-वोटिंग और विधायकों की टूट-फूट को रोकने के लिए राजनीतिक दलों ने अपने-अपने विधायकों की घेराबंदी शुरू कर दी है। कई जगहों पर विधायकों को रिसॉर्ट में ठहराया गया है तो कहीं उन्हें रोजाना पार्टी नेतृत्व के सामने उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। देशभर में इस बार राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। इनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुन लिए गए हैं। अब बिहार की पांच, ओडिशा की चार और हरियाणा की दो सीटों पर मतदान होना है। नतीजे भी सोमवार को ही घोषित किए जाएंगे। कुछ जगहों पर मुकाबला कड़ा है और क्रॉस-वोटिंग या निर्दलीय उम्मीदवार परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। ओडिशा में चौथी सीट पर दिलचस्प मुकाबला ओडिशा में चार सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। विधानसभा में बीजेपी के 79 विधायक हैं और पार्टी ने अपने प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा सांसद सुजीत कुमार को मैदान में उतारा है। बीजद ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी सहयोगी संत्रुप्त मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है। चौथी सीट को लेकर मुकाबला सबसे दिलचस्प माना जा रहा है। इस सीट के लिए बीजेपी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे को समर्थन दिया है, जबकि बीजेडी ने कांग्रेस के साथ मिलकर प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ। दत्तेश्वर होता को समर्थन देने का फैसला किया है। बिहार में पांचवीं सीट पर नजर बिहार में पांच सीटों के लिए चुनाव हो रहा है, जहां संख्याबल के आधार पर एनडीए चार सीटें आसानी से जीत सकता है। एनडीए के पास विधानसभा में कुल 202 विधायक हैं, जबकि एक उम्मीदवार को जीत के लिए 41 वोट की जरूरत है। एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी राज्यसभा के लिए नामांकन किया है, जिससे राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा है। इसके अलावा भाजपा के नितिन नवीन, जदयू के रामनाथ ठाकुर और शिवेश कुमार तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा को भी उम्मीदवार बनाया गया है। हरियाणा में भी मुकाबला रोचक हरियाणा में दो सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। बीजेपी के पास 48 विधायक हैं और पार्टी के उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार करमवीर सिंह बौद्ध को भी पार्टी और सहयोगियों के समर्थन से पर्याप्त वोट मिलने की उम्मीद है। हालांकि इस बार निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नंदल के मैदान में आने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। नंदल को बीजेपी के करीबी के तौर पर देखा जाता है और पिछले चुनावों में कांग्रेस को क्रॉस-वोटिंग का नुकसान उठाना पड़ा है, जिससे इस बार भी राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी हुई है। इस वजह से कांग्रेस के कुछ विधायकों को हिमाचल प्रदेश भेजा गया है जहां कांग्रेस की सरकार है। विनोद उपाध्याय / 15 मार्च, 2026