:: श्रीनगर मेन में महाशिवपुराण कथा का यज्ञ-हवन के साथ हुआ समापन :: इंदौर (ईएमएस)। शिव पुराण केवल सुनने की नहीं, बल्कि जीवन और आचरण में उतारने की कथा है। भगवान शिव का परिवार हमें सिखाता है कि कैसे विपरीत स्वभाव और प्रवृत्ति वाले लोगों के साथ सामंजस्य बिठाकर सुखद गृहस्थ धर्म का पालन किया जा सकता है। यह प्रेरक विचार प्रख्यात आचार्य पं. विष्णुदत्त शर्मा महर्षि ने व्यक्त किए। वे रविवार को श्रीनगर मेन स्थित गार्डन में खत्री महिला मंच एवं खत्री सभा द्वारा आयोजित महाशिवपुराण कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। पं. शर्मा ने शिव परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह शिवजी के सानिध्य में विपरीत स्वभाव वाले जीव (जैसे चूहा-मोर और सांप-मोर) एक साथ रहते हैं, उसी तरह हमें भी परिवार में समन्वय बनाकर रहना चाहिए। कथा के अंतिम दिन उन्होंने भस्मासुर अवतार और नंदीजी की सवारी का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर भक्त भाव-विभोर हो उठे। समापन अवसर पर आयोजित विशेष यज्ञ-हवन में सैकड़ों समाज बंधुओं ने राष्ट्र और परिवार की सुख-शांति के लिए आहुतियां दीं। खत्री सभा के अध्यक्ष प्रदीप बिरदी, महिला मंच अध्यक्ष रीता टंडन और अन्य पदाधिकारियों ने पं. विष्णुदत्त शर्मा को शॉल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। इस दौरान समाज के निर्मल मेहरा, श्याम मेहता, सुनील कत्याल और ममता सेठ सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। प्रकाश/15 मार्च 2026