राष्ट्रीय
16-Mar-2026
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लखनऊ(ईएमएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में संगठन की कार्यप्रणाली और भौगोलिक संरचना में क्रांतिकारी बदलावों को अंतिम रूप दे दिया है। संघ के शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ते कदमों के बीच यह निर्णय लिया गया है कि अब भविष्य में प्रांत की वर्तमान प्रशासनिक संरचना को समाप्त कर दिया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत अब पूरे देश में संघ के कार्यों का संचालन क्षेत्र और संभाग के स्तर से किया जाएगा। इस बड़े फेरबदल को अगले साल मार्च के बाद प्रभावी रूप से लागू करने की तैयारी है। इस नई रणनीति के अंतर्गत उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को मिलाकर एक संयुक्त उत्तर क्षेत्र बनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश में शाखाओं की विशाल संख्या को देखते हुए इसे 10 प्रमुख संभागों में विभाजित किया गया है, जिनमें मेरठ, ब्रज, बरेली, लखनऊ, कानपुर, झांसी, प्रयाग, अयोध्या, काशी और गोरखपुर शामिल हैं। वहीं, उत्तराखंड में कुमाऊं और गढ़वाल के रूप में दो संभाग कार्य करेंगे। क्षेत्र स्तर पर मुख्य रूप से संगठन के समन्वय और विस्तार का कार्य होगा, जबकि संभागों को स्थानीय शाखाओं के प्रशिक्षण और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नई व्यवस्था में पूरे देश को 9 क्षेत्रों और 85 संभागों में बांटकर काम करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में कुछ महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर भी सहमति बनी है, जिसके तहत पश्चिम क्षेत्र के संपर्क प्रमुख की जिम्मेदारी हरीश रौतेला को सौंपी जाएगी और मनोज मिखरा को पश्चिम उत्तर प्रदेश का क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि, प्रतिनिधि सभा ने यह स्पष्ट किया है कि शताब्दी वर्ष के दौरान वर्तमान तैनातियों में कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया जाएगा, बल्कि भविष्य की कार्ययोजना को इस नई संरचना के अनुरूप ढाला जाएगा। यह बदलाव संघ की कार्यक्षमता को और अधिक विकेंद्रीकृत और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस/16मार्च2026