राष्ट्रीय
17-Mar-2026
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-राज्य में मतदान चुनावी रणनीतियों के लिहाज से बहुत अहम, किसकी होगी चांदी कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तिथियों का ऐलान हो गया है। चुनाव कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही राज्य की चुनावी तस्वीर को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। इस बार राज्य में मतदान केवल दो चरणों में कराया जाएगा, जो चुनावी रणनीतियों के लिहाज से बहुत अहम माना जा रहा है। पिछले चुनावों के नतीजों को नए चरणबद्ध कार्यक्रम पर लागू कर देखने से स्पष्ट होता है कि यह व्यवस्था सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल और विपक्षी बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बंगाल में दो चरणों में होने वाले चुनाव ने राज्य के चुनावी परिदृश्य को करीब दो अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया है। पहले चरण में जहां मुकाबला अपेक्षाकृत कड़ा दिखाई देता है, वहीं दूसरे चरण में टीएमसी का दबदबा स्पष्ट नजर आता है। यही वजह है कि दोनों प्रमुख दलों की चुनावी रणनीति भी चरणों के हिसाब से अलग-अलग बनती दिख रही है। 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण में कुल 152 सीटों पर मतदान होना है। बता दें यदि 2021 के विधानसभा चुनाव के नतीजों को इन सीटों के आधार पर देखा जाए तो टीएमसी को करब 92 सीटों पर बढ़त मिलती दिखाई देती है, जो करीब 60.5 फीसदी है। वहीं बीजेपी को 59 सीटों पर जीत मिली थी, जो करीब 38.8 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है, जबकि एक सीट अन्य दलों के खाते में जाती दिखती है। इस चरण का राजनीतिक भूगोल काफी मिश्रित माना जा रहा है। उत्तर, पश्चिम और मध्य पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों में हरे और भगवा दोनों रंगों की मौजूदगी देखी गई थी। इसी क्षेत्र में 2021 के चुनाव के दौरान बीजेपी ने अपनी सबसे मजबूत पकड़ बनाई थी। दूसरे चरण की तस्वीर बीजेपी के लिए कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। 29 अप्रैल को होने वाले इस चरण में कुल 142 सीटों पर मतदान होगा। इन सीटों में से करीब 123 सीटों पर टीएमसी का दबदबा रहा है, जो करीब 86.6 फीसदी हिस्सेदारी बनाता है। इसके विपरीत बीजेपी को केवल 18 सीटों पर जीत मिली थी, जो करीब 12.7 फीसदी के बराबर है, जबकि एक सीट अन्य के खाते में जाती है। यह इलाका टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता है। यही वह क्षेत्र है जिसने सीएम ममता बनर्जी को लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र लंबे समय से तृणमूल के कल्याणकारी कार्यक्रमों और मजबूत संगठनात्मक ढांचे से जुड़ा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस चरण में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती टीएमसी के पारंपरिक मतदाता आधार में सेंध लगाने की होगी। महिलाओं, अल्पसंख्यकों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का समर्थन तृणमूल को लगातार मिलता रहा है, जिससे पार्टी की पकड़ मजबूत बनी हुई है। दो चरणों में होने वाला यह चुनाव पश्चिम बंगाल को दो अलग-अलग चुनावी मैदानों में बांटता दिखाई दे रहा है। एक ओर पहले चरण में कड़ा मुकाबला होने की संभावना है, वहीं दूसरे चरण में तृणमूल का मजबूत प्रभाव नजर आता है। ऐसे में आगामी महीनों में दोनों दलों की रणनीति और चुनावी अभियान इसी विभाजन को ध्यान में रखते हुए तय किए जाने की संभावना है। सिराज/ईएमएस 17 मार्च 2026