राष्ट्रीय
17-Mar-2026
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पटना,(ईएमएस)। बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए हालिया चुनाव ने प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया है। विपक्षी एकजुटता के तमाम दावों के बीच कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के चार विधायकों की गैर-मौजूदगी ने पूरा समीकरण बदल दिया। इस राजनीतिक उठापटक का सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिला और उसके प्रदेश महामंत्री शिवेश राम पांचवीं सीट पर विजयी रहे। यह जीत न केवल भाजपा के कुशल चुनाव प्रबंधन का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि राज्यसभा की जटिल मतदान प्रक्रिया में एक-एक वोट की कीमत क्या होती है। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से एनडीए की चार सीटों पर जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी। असली मुकाबला पांचवीं सीट के लिए था, जहाँ भाजपा ने शिवेश राम और राजद ने अमरेंद्रधारी सिंह उर्फ एडी सिंह को मैदान में उतारा था। पहले चरण की गिनती में शिवेश राम अपने प्रतिद्वंद्वी एडी सिंह से 700 वोटों से पीछे चल रहे थे, लेकिन दूसरी वरीयता के मतों के सटीक प्रबंधन ने पासा पलट दिया। अंततः शिवेश राम ने एडी सिंह को 302 वोटों के अंतर से पराजित कर दिया। इस हार-जीत के पीछे जीत के कोटे का गणित सबसे महत्वपूर्ण रहा। बिहार विधानसभा की 243 सीटों के आधार पर जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन (यानी 4051 वोट) की आवश्यकता थी। लेकिन कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक के मतदान में शामिल न होने से कुल प्रभावी वोट 239 रह गए। इस कारण जीत का कोटा गिरकर 40 विधायकों (3984 वोट) पर आ गया। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विपक्ष के ये चार विधायक वोट देते, तो एडी सिंह को पहली वरीयता में ही आवश्यक वोट मिल जाते और वे चुनाव जीत जाते। भाजपा ने इस चुनाव में जीरो टॉलरेंस की रणनीति अपनाई थी। एनडीए के 202 विधायकों के बीच वोटों का बंटवारा इस तरह किया गया कि नीतीश कुमार, नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर पहली वरीयता के मतों से ही जीत जाएं। इसके बाद इन नेताओं को वोट देने वाले 172 विधायकों को स्पष्ट निर्देश थे कि वे अपनी दूसरी वरीयता का मत अनिवार्य रूप से शिवेश राम को दें। जब दूसरी वरीयता के मतों की जटिल गणना शुरू हुई, तो नीतीश कुमार और नितिन नवीन के अतिरिक्त मतों का मूल्य शिवेश राम के खाते में जुड़ता गया। जैसे ही शिवेश राम का आंकड़ा 4002 पर पहुंचा, उन्होंने 3984 के कोटे को पार कर लिया और उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया। इस चुनाव ने साफ कर दिया कि रणनीति और अनुशासन के अभाव में विपक्षी गठबंधन संख्या बल होने के बावजूद मात खा गया। वीरेंद्र/ईएमएस/17मार्च2026