-खामेनेई ने कम उम्र में ही भारत पर लिखी थी किताब, आज़ादी व इतिहास का किया जिक्र नई दिल्ली,(ईएमएस)। इजराइल-अमेरिका द्वारा तेहरान पर किए गए हमले में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातु्ल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। खामेनेई को सिर्फ ईरान में ही नहीं बल्कि भारत में भी याद किया जाता है। कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के अलीपुरा गांव में एक गर्भवती महिला की मौत ने सालों पहले खामेनेई पर ऐसा असर डाला कि वहां उन्होंने अस्पताल बनवाया। एक कार्यक्रम में अब्दुल मजीद हाकीम इलाही ने इस घटना का जिक्र किया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इलाही ने बताया कि 1980 के दशक की शुरुआत में जब खामेनेई भारत आए थे, तब वह कर्नाटक के अलीपुरा गांव में हुई एक दुखद घटना से बहुत प्रभावित हुए। उन्हें पता चला कि बेंगलुरु जाते समय एक गर्भवती महिला की रास्ते में मौत हो गई क्योंकि आसपास कोई अस्पताल नहीं था। यह जानकर खामेनेई बहुत भावुक हो गए। उन्होंने तुरंत घोषणा की कि वे गांव में अस्पताल बनवाएंगे, ताकि लोगों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े। बाद में वहां अस्पताल का निर्माण कराया गया। इलाही ने बताया कि खामेनेई को भारत की सभ्यता और विविधता से खास लगाव था। वे अक्सर कहते थे कि भारत में कई धर्म और समुदाय होने के बावजूद लोग एक साथ प्यार-मोहब्बत से रहते हैं, जो दुनिया के लिए उदाहरण है। इलाही के मुताबिक खामेनेई ने कम उम्र में ही भारत पर एक किताब लिखी थी, जिसमें भारत की आज़ादी और इतिहास का जिक्र किया गया था। इलाही ने बताया कि एक बार भारत के पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से उनकी मुलाकात 15-20 मिनट के लिए प्रस्तावित थी, लेकिन यह बातचीत डेढ़ घंटे तक चली। इस दौरान उन्होंने भारत की संस्कृति, इतिहास और दर्शन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि एक बार तो किसी ने खामेनेई से टिप्पणी करते हुए कहा कि आपको तो भारत के इतिहास के बारे में प्रोफेसर से भी ज्यादा जानकारी है। बता दें ईरान में इस्लामी क्रांति के शुरुआती सालों में खामेनेई ने एक युवा धर्मगुरु के रूप में 1980 के दशक में कर्नाटक और कश्मीर का दौरा किया था। उन्होंने हैदराबाद के चारमिनार और दिल्ली की जामा मस्जिद के इतिहास से जुड़ी कुछ जानकारियां भी अपने गाइड को सुधारते हुए बताई थीं। इलाही ने बताया कि खामेनेई को कविता से भी गहरा लगाव था और वे भारतीय कविता की आध्यात्मिकता की खूब तारीफ करते थे। सिराज/ईएमएस 17 मार्च 2026