तेहरान,(ईएमएस)। वेस्ट एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और ईरान के हालिया दावे ने अमेरिका और इजरायल की चिंता बढ़ा दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि उनके देश को रूस और चीन से सहयोग मिल रहा है, जिसमें सैन्य सहायता भी शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सहयोग केवल राजनीतिक या आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और सैन्य क्षेत्रों तक फैला हुआ है। इस पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूस शायद ईरान को कुछ हद तक सहायता प्रदान कर रहा है। उनका अनुमान है कि रूस ऐसा इसलिए कर सकता है क्योंकि अमेरिका यूक्रेन को समर्थन दे रहा है, और पुतिन उसी तर्क के आधार पर प्रतिक्रिया दे रहे है। पिछले एक दशक में ईरान और रूस के बीच संबंध काफी मजबूत हुए हैं, खासकर अमेरिका और पश्चिमी देशों के विरोध के बीच। यूक्रेन युद्ध के दौरान, ईरान ने रूस को शाहेद ड्रोन उपलब्ध कराए हैं, जिनका उपयोग रूस ने यूक्रेन पर हमलों के लिए किया। इसके अलावा, रूस में इन ड्रोन के उत्पादन के लिए कारखाने स्थापित करने की खबरें सामने आई हैं। दोनों देशों ने सीरिया में बशर अल-असद की सरकार का समर्थन करने में भी सहयोग किया है। ईरान और चीन के संबंध भी लगातार मजबूत हो रहे हैं। 2021 में दोनों देशों ने 25 साल के व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसका मुख्य केंद्र ईरान के तेल संसाधनों की आपूर्ति है। इस समझौते से चीन की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होती है, जबकि ईरान को आर्थिक समर्थन प्राप्त होता है। अरागची ने होरमुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव पर भी टिप्पणी की। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। हाल के तनावों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। अरागची ने कहा कि स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, लेकिन ईरान के दुश्मनों और उनके समर्थन करने वाले देशों के जहाजों के लिए मार्ग बंद है। अमेरिकी और इजरायली जहाजों को मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं है, जबकि अन्य देशों के जहाजों के लिए रास्ता खुला है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होरमुज में तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि ईरान रूस और चीन के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी स्थापित कर रहा है, जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नई चुनौतियाँ पैदा कर रही है। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए इस स्थिति का प्रबंधन करना जटिल हो सकता है, और दुनिया की सुरक्षा और ऊर्जा स्थिरता के दृष्टिकोण से यह मामला बहुत संवेदनशील बन गया है। आशीष/ईएमएस 18 मार्च 2026