राज्य
18-Mar-2026
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- बॉम्बे हाई कोर्ट ने 26 साल के युवक के खिलाफ रेप और उससे जुड़ी कानूनी कार्रवाई वाली एफआईआर को रद्द किया मुंबई, (ईएमएस)। बॉम्बे हाई कोर्ट ने असम के एक 26 साल के युवक के खिलाफ रेप और उससे जुड़ी कानूनी कार्रवाई वाली एफआईआर को रद्द कर दिया है। यह फैसला उसकी 27 साल की पूर्व-गर्लफ्रेंड की सहमति से लिया गया, जो अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए अपने गृह राज्य मेघालय लौटना चाहती है। न्यायाधीश अश्विन भोबे ने कहा, आपराधिक कार्रवाई जारी रखने से कोई मकसद पूरा नहीं होगा। इससे जुड़े सभी लोगों, खासकर प्रतिवादी (महिला) को सिर्फ़ लंबे समय तक मानसिक परेशानी ही होगी। एफआईआर के मुताबिक, दोनों पुणे में एक बीपीओ कंपनी में काम करते थे और सितंबर 2023 से साथ रह रहे थे। महिला को मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उसके पार्टनर ने उस पर कई बार हमला किया, जिसमें वह समय भी शामिल है जब उसने बताया कि वह गर्भवती है। वह उसे एक क्लिनिक ले गया, जहाँ उसका गर्भपात करवा दिया गया और हमलों के कारण उसे जुलाई 2024 में पुणे छोड़ना पड़ा। एफआईआर अगस्त 2024 में दर्ज की गई थी, जिसमें बार-बार रेप, गर्भपात करवाने और आपराधिक धमकी देने के आरोप शामिल थे। नवंबर 2024 में चार्जशीट दाखिल की गई। दिसंबर 2024 में उस युवक को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया। उसने हाई कोर्ट में अर्जी दी कि बड़ों के दखल से उन्होंने इस मामले को आपसी सहमति से सुलझा लिया है और महिला ने 5 फरवरी को आपराधिक कार्रवाई रद्द करने पर अपनी कोई आपत्ति नहीं जताई है। उसके वकील गणेश गुप्ता और महिला के वकील हर्षद डेंगाले ने कहा कि गलतफहमियों के कारण महिला ने आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों को तनाव और तकलीफ़ का सामना करना पड़ा। सरकारी वकील तनवीर खान ने ज़ोर देकर कहा कि आपराधिक कार्रवाई रद्द करने के बदले उस युवक पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए। न्यायाधीश भोबे ने महिला के 5 फरवरी के सहमति हलफ़नामे पर गौर किया, जिसमें कहा गया था कि यह उसकी अपनी मर्ज़ी से और किसी भी व्यक्ति के किसी भी दबाव या ज़बरदस्ती के बिना दाखिल किया गया है। उन्होंने उसके इस बयान पर विचार किया कि वह एक शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए अपने अतीत को पीछे छोड़ना चाहती है, आगे की पढ़ाई (यानी, पॉलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री) करना चाहती है और आपराधिक कार्रवाई जारी नहीं रखना चाहती, साथ ही हलफ़नामे में उसकी कोई आपत्ति न होने की बात पर भी विचार किया। इसलिए, इस मामले के खास तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, न्याय के हित में, न्यायाधीश भोबे ने एफआईआर और चार्जशीट को रद्द कर दिया, लेकिन इसके लिए 1 लाख रुपये का जुर्माना भरने की एक शर्त रखी। उन्होंने उसे निर्देश दिया कि वह दो हफ़्तों के अंदर दिल्ली स्थित एनजीओ दीपस्तंभ फाउंडेशन को 1 लाख रुपये का जुर्माना अदा करे। संजय/संतोष झा- १८ मार्च/२०२६/ईएमएस