इन्दौर (ईएमएस) आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने केनरा बैंक से 2.33 करोड़ रुपए के फर्जी दस्तावेजों के जरिये ऋण हासिल करने के मामले में बैंक अफसरों सहित 7 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि मेसर्स अबू रोडलाइंस के संचालक करामत खान ने अपने साथियों के साथ मिलकर वर्ष 2017 में सिंडीकेट बैंक (अब केनरा बैंक), नंदा नगर शाखा से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर ऋण प्राप्त किया। मामले में तत्कालीन ब्रांच मैनेजर जतिन गुप्ता, क्रेडिट मैनेजर कमलेश दरवानी, मूल्यांकनकर्ता इंजीनियर सुनील जैन की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। लोन के लिए ग्रीन पार्क कॉलोनी स्थित मकान नंबर 435-A के फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जबकि यही संपत्ति पहले से ही इंडियन बैंक में गिरवी रखी थी और वर्ष 2021 में नीलाम भी हो गई। ईओडब्ल्यू ने जांच की तो खुलासा हुआ कि आरोपी ने पहले 2016 में 1.10 करोड़ रुपए का ऋण लिया था। बाद में ऋण सीमा बढ़ाने के लिए कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया गया। पेनल एडवोकेट और मूल्यांकनकर्ता द्वारा गलत रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के चलते 21 नवंबर 2017 को 2.33 करोड़ रुपए का ऋण स्वीकृत कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि बैंक अफसरों ने केवायसी और ड्यू डिलिजेंस प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती, जिससे यह फर्जीवाड़ा हुआ। ऋण की अदायगी नहीं होने पर 30 दिसंबर 2019 को खाते को एनपीए घोषित कर दिया गया। इसके बाद सरफेसी कार्रवाई के दौरान फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जिसके बाद ईओडब्ल्यू ने मामले में करामत खान, मोहम्मद रफीक, जतिन गुप्ता, कमलेश दरवानी, सुनील जैन, जावेद खान और मोहम्मद इरफान खान के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है। दस्तावेजों की जांच और बैंकिंग प्रक्रिया की पड़ताल जारी है। आनंद पुरोहित/ 18 मार्च 2026