महंगाई की दोहरी मार। भोपाल बेहाल! रसोई में 2000 रुपये का सिलेंडर बम, अब नगर निगम की 10 प्रतिशत टैक्स वाली सर्जिकल स्ट्राइक भोपाल (ईएमएस)। राजधानी भोपाल में आम आदमी की कमर टूटने वाली है। एक तरफ जहां घरेलू और कमर्शियल गैस की किल्लत और 2000 रुपये तक पहुँचती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम ने प्रॉपर्टी और वाटर टैक्स में 10 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव लाकर जनता की मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। बच्चे पाले या टैक्स भरें? शहर की सड़कों पर फल बेचने वाली एक महिला ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, साहब, सिलेंडर के दाम सुनकर ही पसीने छूट रहे हैं, अब ऊपर से ये नया टैक्स। अगर हम सारा पैसा इन्हीं चीजों में फूंक देंगे, तो बच्चों को क्या खिलाएंगे और कैसे पढ़ाएंगे? यह तो सरासर मनमानी है। युद्ध के बहाने जेब पर डाका? वरिष्ठ नागरिकों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर छिड़े युद्धों का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, जिसके कारण गैस की किल्लत और महंगाई बढ़ी है। एक रिटायर्ड अधिकारी ने कहा, जब जनता पहले से ही वैश्विक संकट और किल्लत से जूझ रही है, तो नगर निगम को कम से कम तब तक यह टैक्स वृद्धि टाल देनी चाहिए जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते। यह वक्त राहत देने का है, बोझ डालने का नहीं। निगम का तर्क बनाम जनता का आक्रोश नगर निगम इस बढ़ोत्तरी को विकास कार्यों और आय बढ़ाने का जरिया बता रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि पिछले साल भी संपत्ति कर में 10 प्रतिशत और जल दर में 15 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। लगातार दूसरे साल जनता पर यह प्रहार उन्हें बर्बादी की कगार पर खड़ा कर रहा है। स्वाती/ 18 मार्च /2026