क्षेत्रीय
18-Mar-2026
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- दो साल से लंबित जांच, नोटिस के बावजूद पेश नहीं हुआ आरोपी अफसर - तहसील रिकॉर्ड में नहीं मिला प्रमाणपत्र, साजिश के आरोप गहराए बिलासपुर (ईएमएस)। फर्जी जाति प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें मध्यप्रदेश के आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी पर अनुसूचित जनजाति (एसटी) का फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर 35 साल तक नौकरी करने का आरोप लगा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग ने सख्ती दिखाते हुए बिलासपुर कलेक्टर और मध्यप्रदेश आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब तलब किया है। आरटीआई से खुला मामला, वकील ने की शिकायत इंदौर निवासी वकील और आरटीआई एक्टिविस्ट राजेंद्र गुप्ता ने इस पूरे मामले का खुलासा किया है। उनकी शिकायत के मुताबिक, ग्वालियर में पदस्थ अपर आयुक्त राजेश हेनरी ने वर्ष 1990-91 में कथित रूप से फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाया और खुद को आदिवासी बताकर आबकारी विभाग में नौकरी हासिल की। इसके बाद वे विभाग में अलग-अलग पदों पर पदस्थ रहते हुए करीब तीन दशक से अधिक समय तक सेवा करते रहे। बिलासपुर तहसील के नाम पर फर्जीवाड़े का आरोप शिकायत में यह भी सामने आया कि राजेश हेनरी ने बिलासपुर तहसील के नाम से जारी जाति प्रमाणपत्र का उपयोग किया। लेकिन जब आरटीआई के तहत तहसील कार्यालय के रिकॉर्ड खंगाले गए, तो साल 1990-91 के दायरा पंजी में ऐसा कोई प्रकरण दर्ज ही नहीं मिला। इससे प्रमाणपत्र की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और फर्जीवाड़े की आशंका और मजबूत हुई है। जांच दो साल से अटकी, अफसर नहीं हुए पेश छत्तीसगढ़ की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने मामले की जांच के लिए इसे जिला स्तरीय जाति छानबिन समिति को भेजा था। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि करीब दो साल बीत जाने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी। आदिवासी विकास विभाग के अनुसार, राजेश हेनरी को कई बार दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया गया, लेकिन वे जांच में शामिल नहीं हुए। आयोग की सख्ती से बढ़ा दबाव अब मामला राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने के बाद एससी/एसटी आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है। आयोग ने बिलासपुर कलेक्टर और मध्यप्रदेश आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मनोज राज 18 मार्च 2026