गुना (ईएमएस)। शहर के नवस्थापित क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक शुचिता के बजाय अजीबोगरीब फरमानों और छात्रों के आर्थिक शोषण को लेकर अपनी एक अलग पहचान बना ली है। ताजा मामला छात्रों की प्रोफाइल बनवाने और उस पर थोपे गए अव्यवहारिक विलंब शुल्क का है, जिसने विश्वविद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रोफाइल के नाम पर डाटा का दोहरा खेल हैरानी की बात यह है कि प्रवेश, नामांकन और परीक्षा फॉर्म के समय छात्र अपनी समस्त वांछित जानकारियां ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध करा चुके हैं। इसके बावजूद, विश्वविद्यालय प्रशासन दोबारा छात्रों से प्रोफाइल बनवाने का दबाव बना रहा है। शुरुआत में इस प्रोफाइल की फीस 200 रुपये रखने की योजना थी, लेकिन निजी कॉलेजों और छात्र संगठनों के कड़ेे विरोध के बाद इसे घटाकर 20 रुपये किया गया। छात्र सवाल उठा रहे हैं कि जब सारा डाटा पहले से ही विवि के पास है, तो बार-बार जानकारी जुटाने का यह अनोखा स्वांग क्यों रचा जा रहा है? लूट का नया कीर्तिमान, 1000 प्रतिशत जुर्माना! विवि प्रशासन की तानाशाही का आलम यह है कि जो छात्र निर्धारित समय सीमा में 20 रुपये की फीस जमा नहीं कर पाए, उनसे अब 200 रुपये विलंब शुल्क वसूला जा रहा है। गणितीय दृष्टि से देखें तो यह मूल फीस का सीधा 1000 प्रतिशत है। संभवत: पूरे विश्व में यह पहला ऐसा विश्वविद्यालय होगा, जहां विलंब शुल्क मूल राशि से दस गुना ज्यादा है। छात्रों ने इसे सरेआम लूट करार देते हुए तत्काल बंद करने की मांग की है। नेताओं की कुंभकर्णी नींद और छात्रों का आक्रोश उल्लेखनीय है कि यह वही विश्वविद्यालय है जिसने पूर्व में परीक्षा परिणामों में भारी गड़बड़ी की थी और बाद में कुलपति ने विशेष कृपांक के नाम पर इतिहास रचा था। विवि की इन मनमानियों पर सत्ताधारी दल के नेताओं की चुप्पी ने छात्रों के घावों पर नमक छिडक़ने का काम किया है। युवाओं का कहना है कि नेताओं की कुंभकर्णी नींद अब सीधे चुनाव में ही खुलेगी, जब आक्रोशित नवयुवक उनका खुलेआम विरोध करेंगे। छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे जल्द ही इस पूरी धांधली और विवि के मुद्दों से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को अवगत कराएंगे, ताकि इस संगठित लूट पर लगाम लग सके।- सीताराम नाटानी