-बिहार का सीएम बीजेपी से ही होगा! शाह और केंद्रीय नेताओं की पसंद सम्राट चौधरी नई दिल्ली,(ईएमएस)। नीतीश कुमार के राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होते ही सीएम पद से उनके इस्तीफे का काउंट डाउन शुरू हो गया है। उनके इस्तीफे की तारीख का अनुमान भी लोग लगाने लगे हैं। सीएम पद छोड़ने में थोड़ा वक्त लग सकता है लेकिन इतना तय है कि 15 अप्रैल तक वे सीएम पद से भी इस्तीफा दे देंगे। जन प्रतिनिधित्व कानून के मुताबिक कोई व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता। एक सदन का सदस्य रहते कोई दूसरे सदन का सदस्य निर्वाचित होता है तो उसे एक सदन से 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देना होता है। नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए 16 मार्च को निर्वाचित हुए हैं। वे किस सदन का सदस्य रहेंगे, अब उन्हें तय करना है लेकिन हर हाल में उन्हें 14 दिनों के अंदर ही यह फैसला करना होगा। नीतीश के संदर्भ में वह तारीख 30 मार्च होगी। वे पहले से बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं। अनुमान है कि नीतीश अपनी चल रही समृद्धि यात्रा खत्म होते ही इस्तीफा दे देंगे। हालांकि वे चाहें तो विधान परिषद से इस्तीफे के बाद भी 6 महीने तक सीएम पद पर बने रह सकते हैं। नीतीश के सीएम पद छोड़ने पर बीजेपी से नया सीएम बनना तय है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में बीजेपी का सीएम बनना ऐतिहासिक पल होगा। बिहार में पहली बार बीजेपी का नेता सीएम बनेगा। बीजेपी की सालों पुरानी मुराद अब पूरी होने जा रही है। 2005 से नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए सरकार चल रही है, मुख्यमंत्री हमेशा जेडीयू से ही रहा है। बीजेपी दो मौकों पर सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सीएम पद से वंचित रही। अब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के साथ बीजेपी का यह लंबा इंतजार खत्म होने वाला है। 2020 में बीजेपी विधायकों की संख्या जेडीयू से ज्यादा थी। तब भी सीएम नीतीश कुमार ही बने थे। तब बीजेपी के 80 तो जेडीयू के 43 विधायक थे। 2025 में भी बीजेपी ने दूसरी बार जेडीयू से ज्यादा सीटें जीतीं। इसके बावजूद गठबंधन की शर्तों के मुताबिक बीजेपी ने सीएम की कुर्सी जेडीयू को ही सोंप दी। नीतीश ने 10वीं बार सीएम पद की शपथ ली। अब चूंकि नीतीश राज्यसभा के लिए चुन लिए गए हैं, इसलिए बीजेपी का सीएम बनना तय है। बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि नीतीश कुमार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव शुरू होने के पहले सीएम की कुर्सी छोड़ दें। बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना पार्टी के लिए बंगाल में मनोबल बढ़ाने वाला होगा। बंगाल में बीजेपी पिछड़ा और अन्य वर्गों को साधने की कोशिश कर रही है, पिछड़े वर्ग के नेता का सीएम बनने बंगाल में भी संदेश जाएगा। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना और बीजेपी का सीएम बनना एनडीए की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वहीं विपक्षी महागठबंधन इसे बीजेपी की साजिश बता रहा है, लेकिन एनडीए इसे विकास और स्थिरता का प्रतीक मान रहा है। नीतीश के इस्तीफे के बाद सीएम की रेस में कई नाम चर्चा में हैं। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय भी पिछड़ा वर्ग से आते हैं। यादव समाज की 14 फीसदी आबादी को देखते हुए उनके नाम की चर्चा हो रही है। वे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के विश्वासपात्र भी माने जाते हैं। उन्हें सीएम बनाया जाता है तो वे आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की काट साबित होंगे। उनके अलावा पिछड़े वर्ग से आने वाले दिलीप जायसवाल के नाम की भी चर्चा है। बीजेपी ने अगर सवर्ण समाज से किसी को सीएम की कुर्सी सौंपने का मन बनाया तो विजय सिन्हा का नाम भी हो सकता है। वे अभी डेप्युटी सीएम हैं। इन सभी नामों के अलावा डेप्युटी सीएम सम्राट चौधरी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। सम्राट चौधरी के नाम पर भाजपा में सहमति बनने की संभावना अधिक दिख रही है। बीजेपी ने उन्हें ओबीसी चेहरा बना कर पेश किया है, जो बिहार की जातीय समीकरण में अहम है। नीतीश कुमार के ईबीसी और दलित वोट बैंक को बनाए रखने के लिए सम्राट जैसे नेता की ही जरूरत है। अमित शाह और अन्य केंद्रीय नेताओं की पसंद भी सम्राट चौधरी ही हैं। राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा जोरों पर है कि 15 अप्रैल के पहले बिहार में नई सरकार बन जाएगी। बंगाल में उसके बाद विधानसभा के चुनाव शुरू होंगे। बंगाल की जनता को साधने के लिए बीजेपी ने पहले नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है। बंगाल में कायस्थ इंटलेक्चुअल समाज का हिस्सा माने जाते हैं। नबीन कायस्थ बिरादरी से ही आते हैं। बंगाल के पिछड़े वोटरों को ध्यान में रख कर बीजेपी सम्राट के जरिए संदेश देना चाहेगी कि वह उनकी हितैषी है। बीजेपी का जोर युवा नेतृत्व पर भी बढ़ा है। सिराज/ईएमएस 19 मार्च 2026