अंतर्राष्ट्रीय
19-Mar-2026
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तेहरान (ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान को बिना शर्त घुटने टेकने होंगे, वहीं ईरान भी किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं है। इस बीच इजरायली मिसाइलें लगातार ईरानी ठिकानों को निशाना बना रही हैं। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे संघर्ष के केंद्र में ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसका यूरेनियम भंडार है, जिसे जब्त करना अमेरिका और इजरायल का मुख्य उद्देश्य नजर आ रहा है। ताजा सैन्य आकलनों के मुताबिक, ईरान के समृद्ध यूरेनियम के भंडार को कब्जे में लेना कोई आसान काम नहीं है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए इतिहास का सबसे बड़ा स्पेशल फोर्स ऑपरेशन करना पड़ सकता है। पिछले साल जून में ईरानी परमाणु ठिकानों पर हुई बमबारी के समय यह माना जा रहा था कि तेहरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम है, जिससे कम से कम दस परमाणु बम बनाए जा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, इस भंडार का बड़ा हिस्सा इस्फाहान परमाणु साइट के भीतर एक जटिल टनल नेटवर्क में सुरक्षित रखा गया है। नाटो के पूर्व कमांडरों का मानना है कि इतने संवेदनशील मटीरियल को निकालने के लिए केवल हवाई हमले काफी नहीं होंगे। इसके लिए जमीन पर एक विशाल फौज उतारनी होगी, जो मलबे के बीच बिछी माइंस और बूबी ट्रैप्स को साफ करते हुए खुदाई कर सके। इस ऑपरेशन के लिए एक स्थानीय एयरफील्ड की जरूरत होगी और यदि वह उपलब्ध नहीं हुआ, तो युद्ध के बीच ही एक अस्थायी रनवे बनाना होगा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अमेरिकी और इजरायली सैनिकों पर ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा बना रहेगा, जिससे निपटने के लिए एक सुरक्षा घेरा तैयार करना अनिवार्य होगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में स्वीकार किया कि उनके परमाणु केंद्रों पर हमले हुए हैं और काफी कुछ मलबे में दब गया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने परमाणु भंडार के भविष्य को लेकर किसी भी दबाव में बातचीत करने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि फिलहाल उनका प्राथमिक लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमता और ड्रोन नेटवर्क को नष्ट करना है, लेकिन भविष्य में परमाणु भंडार को जब्त करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। 28 फरवरी से शुरू हुई यह सीधी सैन्य जंग अब उस मोड़ पर पहुँच गई है जहाँ कूटनीति के रास्ते बंद नजर आ रहे हैं और परमाणु हथियारों की होड़ ने पूरे विश्व को चिंता में डाल दिया है। वीरेंद्र/ईएमएस 19 मार्च 2026