अंतर्राष्ट्रीय
19-Mar-2026
...


तेहरान (ईएमएस)। अमेरिका और इजरायल के भीषण हवाई हमलों के बावजूद ईरान की इस्लामिक सत्ता फिलहाल डगमगाती नहीं दिख रही है। ताजा खुफिया आकलन बताते हैं कि हालांकि युद्ध ने ईरान की सैन्य क्षमता को नुकसान पहुँचाया है, लेकिन वहां की सत्ता संरचना अब भी अडिग है। जानकारों का मानना है कि इस संघर्ष के बाद ईरान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक कठोर और कट्टर हो सकती है। दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने अपने जीवनकाल में जो संस्थागत ढांचा खड़ा किया था, वही अब इस गणराज्य को टिकाए रखने में ढाल बना हुआ है। पिछले दो हफ्तों से जारी हमलों में मिसाइल ठिकानों और नौसैनिक अड्डों को निशाना बनाया गया है, जिसमें कई शीर्ष अधिकारी मारे गए हैं। इसके बावजूद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने देश की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था पर अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दी है। यही कारण है कि रेजीम चेंज यानी शासन परिवर्तन की संभावनाएं फिलहाल बेहद कम हैं। ईरान की सत्ता किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है। खामेनेई ने सुरक्षा तंत्र और धार्मिक नेतृत्व के बीच ऐसा संतुलन बनाया था जो संकट के समय भी काम करता रहे। अब उनके बेटे मोजतबा खामेनेई सत्ता के नए चेहरे के रूप में उभर सकते हैं, जो आईआरजीसी के साथ मिलकर शासन चलाएंगे। विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध के बाद तेहरान में एक ऐसा शासन उभरेगा, जिसमें सैन्य बल की भूमिका पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का ईरान में सत्ता बदलने का लक्ष्य फिलहाल आसान नहीं दिख रहा। ईरानी नेतृत्व यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उसने भारी दबाव के बावजूद अपना अस्तित्व बचाए रखा है। वहीं, घरेलू मोर्चे पर भी सत्ता समर्थक तबका आक्रामक है। हालांकि कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता अंदरूनी गुस्से की बात कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की सख्त निगरानी के कारण कोई बड़ा विद्रोह नजर नहीं आता। यह युद्ध अमेरिका के लिए भी महंगा साबित हो रहा है। करीब 12 अरब डॉलर के खर्च और सैनिकों की मौत ने वाशिंगटन की चिंता बढ़ा दी है। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे वैश्विक ऊर्जा मार्ग पर ईरान की पकड़ ने दुनिया की आर्थिक नस दबा रखी है। तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक बाजार में अस्थिरता है। कुल मिलाकर, खामेनेई का तैयार किया गया तंत्र फिलहाल अभेद्य बना हुआ है, जिससे पश्चिमी देशों की सत्ता परिवर्तन की रणनीति अधूरी रह सकती है। वीरेंद्र/ईएमएस 19 मार्च 2026