राष्ट्रीय
19-Mar-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव ने फिर दुनिया को मिसाइलों के खतरे की याद दिला दी है। इसतरह के माहौल में यह सवाल अहम हो जाता है कि किन देशों के पास ऐसी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) हैं, जो सीधे अमेरिका तक मार कर सकती हैं। इस सूची में सबसे पहले नंबर पर रूस का नाम आता है। रूस के पास दुनिया का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक परमाणु मिसाइल जखीरा माना जाता है। उसकी ‘टोपोल-एम’ जैसी आईसीबीएम मिसाइलें 11,000 किलोमीटर से भी अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम हैं। ये मिसाइलें उत्तरी ध्रुव के ऊपर से उड़ान भरकर अमेरिका के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती हैं। शीत युद्ध के दौर से ही रूस और अमेरिका के बीच यह रणनीतिक संतुलन बना हुआ है, जिसे “न्यूक्लियर डिटरेंस” कहा जाता है। वहीं इस सूची में दूसरे नंबर पर चीन का नाम आता है, जो कि पिछले कुछ दशकों में अपनी सैन्य ताकत में तेजी से विस्तार कर रहा है। चीन की ‘डीएफ-41’ मिसाइल दुनिया की सबसे उन्नत आईसीबीएम में गिनी जाती है। इसकी रेंज इतनी लंबी है कि यह करीब 30 मिनट के भीतर अमेरिका तक पहुंच सकती है। चीन के पास जमीन से लांच होने वाली मिसाइलों के साथ-साथ पनडुब्बियों से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों की क्षमता भी है, जिससे उसकी रणनीतिक ताकत और बढ़ जाती है। तीसरे स्थान पर सनकी तानाशाह के देश उत्तर कोरिया का नाम आता है। सीमित संसाधनों और कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद उसने अपनी मिसाइल तकनीक में उल्लेखनीय प्रगति की है। हाल के वर्षों में उसके कई आईसीबीएम मिसाइलों का परीक्षण सफल रहे हैं, जो यह संकेत देते हैं कि वह अमेरिका तक मार करने में सक्षम हो सकता है। उत्तर कोरिया की मिसाइल नीति मुख्य रूप से अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। वहीं ईरान ने भी हाल ही में 10,000 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइल विकसित करने का दावा किया है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी पूरी तरह नहीं हुई है, लेकिन यदि यह सच साबित होता है, तब ईरान भी उन देशों की सूची में शामिल हो सकता है, जिनके पास अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता है। इसके अलावा भारत और इज़रायल के पास भी लंबी दूरी की उन्नत मिसाइल तकनीक मौजूद है। भारत की ‘अग्नि-5’ मिसाइल 5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार कर सकती है, जबकि इज़रायल की ‘जेरिको’ मिसाइल प्रणाली को भी अत्याधुनिक माना जाता है। हालांकि ये दोनों देश मुख्य रूप से अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित हैं। यूरोप में ब्रिटेन और फ्रांस के पास भी परमाणु-सक्षम लंबी दूरी की मिसाइलें हैं। लेकिन चूंकि ये देश नाटो के सदस्य हैं और अमेरिका के सहयोगी हैं, इसलिए इन्हें खतरे के रूप में नहीं देखा जाता। कुल मिलाकर, रूस और चीन पहले और दूसरे स्थान पर हैं, जिनके पास अमेरिका तक मार करने की सबसे मजबूत और भरोसेमंद क्षमता है। इनके अलावा कुछ अन्य देश भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे वैश्विक सुरक्षा संतुलन लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। आशीष/ईएमएस 19 मार्च 2026