झांसी(ईएमएस ) नगर निगम वित्तीय संकटों से जूझ रहा है और निगम पर करोड़ों की उधारी है जिसके कारण यहां विकास कार्य ठप हो गए हैं। लेकिन इन परिस्थितियों में भी पार्षदों के एक दल ने शैक्षिक टूर पर जाने की तैयारी कर ली है।यह दल 28 मार्च को गुवाहाटी के लिए रवाना होगा। इस टूर की स्वीकृति मिलने के बाद पार्षदों ने गुवाहाटी जाने की तैयारी शुरू कर दी है इस आर्थिक तंगी के बीच इस दौरे की चर्चा भी खूब होने लगी है। इस आर्थिक तंगी में पार्षदों का इस शैक्षिक टूर पर जाना एक बड़ा प्रश्न चिन्ह नगर निगम पर लगा रहा है। कुछ पार्षद विकास कार्य न होने के कारण धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और नगर निगम के अधिकारी बजट कम होने की दुहाई दे रहे हैं। इन परिस्थितियों में नगर निगम पर इस शैक्षिक टूर को स्वीकृत करना कार्य प्रणाली पर प्रश्नचिन्ह जरूर लग रहा है। पिछले इस तरह के कई शैक्षिक टूर कई वजह से चर्चाओं में रहे हैं। सबसे अधिक चर्चा तो इस बात की होती है कि इस तरह के शैक्षिक टूर से नगर निगम को क्या फायदा होता है? यह टूर इसलिए होते हैं कि दूसरे शहरों में जाकर पार्षद विकास के उम्दा मॉडल को देखें और समझे इसके बाद उसे झांसी में लागू करने का प्रयास करें। लेकिन ऐसा कम ही देखने को मिला है पार्षद टूर से लौटने के बाद कोई सुझाव ही नहीं देते थे। जबकि अब सुझाव देने लगे हैं लेकिन उन पर अमल कभी नहीं होता है। पूर्व में इन शैक्षिक दौरों में यह भी देखा गया की महिला पार्षद के स्थान पर उसके परिजन इन टूर पर चले जाते थे या कई बार कई पार्षद बिना टूर पर जाए पैसा निकाल लेते हैं। ऐसे मामले कई बार सामने आए लेकिन यह टूर बराबर चलते रहे। इस बार इस शैक्षिक टूर की चर्चा इसलिए अधिक हो रही है कि नगर निगम का खजाना लगभग खाली चल रहा है और विभाग पर 30 करोड़ से अधिक की उधारी भी है। इसका प्रभाव महानगर के विकास पर भी पड़ा है इसके बावजूद इस टूर को स्वीकृत करना समझ से परे है। इस बारे में नगर आयुक्त झांसी आकांक्षा राणा का कहना है कि नगर निगम द्वारा पार्षदों को शैक्षिक टूर कराए जाते हैं। इससे पार्षद दूसरे शहरों में होने वाले विकास के नए मॉडल के बारे में जानकारी करते हैं। गुवाहाटी टूर की मंजूरी पहले से हो चुकी थी लेकिन अभी तक यह टूर हो नहीं पाया था। अब 28 मार्च को 9 पार्षदों का दल शैक्षिक टूर पर जाएगा।शरद शिवहरे /ईएमएस /19मार्च