ब्रम्हध्वज स्थापना एवं सम्राट विक्रमादित्य पर केंद्रित नाट्य का हुआ मंचन छिंदवाड़ा (ईएमएस)। महारानी लक्ष्मी बाई स्कूल में गुरूवार को सूर्य उपासना के साथ विक्रमोत्सव 2026 का आयोजन किया गया। सृष्टि आरंभ दिवस, वर्ष प्रतिपदा एवं विक्रम संवत 2083 कार्यक्रम का शुभारंभ कलेक्टर हरेंद्र नारायन, महापौर विक्रम अहके व भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती का पूजन अर्चन कर किया। जिसके बाद नाट्यगंगा रंगमंडल के कलाकारों द्वारा अपनी संगीतमय प्रस्तुति के साथ ब्रम्ह ध्वज की स्थापना की गई और सभी अतिथियों ने संस्कृति विभाग से भेजे गए 14 मंगल ध्वजों का पूजन किया। इन मंगल ध्वजों की स्थापना शहर के 14 प्रतिष्ठित मंदिरों में नगर निगम द्वारा की जाएगी। उल्लेखनीय है कि भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश शासन द्वारा गत वर्ष से विक्रमोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर नगर निगम महापौर विक्रम अहके ने सभी को हिन्दू नववर्ष और विक्रम संवत 2083 के शुभारंभ की बधाई देते हुए पूरे प्रदेश भर में सूर्य उपासना कार्यक्रम के आयोजन के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के गौरवशाली इतिहास से सभी को परिचित कराने के लिए गत वर्ष से शुरू की गई इस पहल के किए मुख्यमंत्री डॉ.यादव का आभार व्यक्त किया। वसुधैव कुटुंबकम् की भावना जगाने मील का पत्थर साबित होगा आयोजन शेषराव यादव ने कहा कि विक्रम संवत् भारतीय संस्कृति, विज्ञान और परम्परा का परिचायक है। विक्रमादित्य जैसे वीर चक्रवर्ती सम्राट की जीवन गाथा, न केवल प्रेरणादायी है, बल्कि अनुकरणीय भी है। उनका अनुकरण वर्तमान और भावी पीढ़ी के लिए सभी को जोड़े रखने और वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को जागृत रखने में मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम में नाट्य गंगा रंगमंडल के कलाकारों द्वारा भोपाल नाट्य एकेडमी द्वारा प्रायोजित सम्राट विक्रमादित्य और विक्रम संवत के इतिहास पर केंद्रित नाट्य का आकर्षक मंचन किया गया। नाट्य में विक्रम नामक पोते और उसके दादाजी के संवाद के माध्यम से राजा विक्रमादित्य के जन्म से लेकर, शकों के आक्रमण, विक्रम सेन के युवावस्था में पहुंचने, शकों को पराजित कर मालवा के नवरत्नों की पहचान कर उनके नेतृत्व में ज्ञान, विज्ञान, भाषा और वैदिक रीति के प्रसार के लिए किए गए कार्यों से लेकर मालवा को समय गणना का वैश्विक केंद्र बनाने और महान चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य बनने तक के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला गया। ईएमएस/मोहने/ 19 मार्च 2026