क्षेत्रीय
21-Mar-2026
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- विश्व जल दिवस पर विशेष-नर्मदा परियोजना बनी जीवनरेखा, खेती, पेयजल, ऊर्जा और विकास को मिली नई दिशा अहमदाबाद (ईएमएस)| पानी प्रकृति की सबसे अनमोल देन है। मानव जीवन, कृषि, उद्योग, पर्यावरण और संपूर्ण जीवनचक्र के लिए पानी अनिवार्य है। इसके बावजूद, विश्वभर में जल संकट, बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के कारण जल संरक्षण और प्रबंधन आज अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि पानी का संयमित उपयोग और जल संसाधनों का संरक्षण मानवता के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। गुजरात के लिए पानी का महत्व विशेष रहा है। राज्य के कई क्षेत्रों में वर्षों तक पानी की कमी और सूखे की समस्या बनी रही। लेकिन नर्मदा नदी पर निर्मित सरदार सरोवर डैम ने इस स्थिति को बदल दिया और यह परियोजना राज्य के जल प्रबंधन के इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम साबित हुई है। इस परियोजना ने कृषि, पेयजल, ऊर्जा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में विकास की नई दिशा दी है। नर्मदा नदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है, जो मध्य प्रदेश के अमरकंटक से निकलकर महाराष्ट्र और गुजरात से बहते हुए अरब सागर में मिलती है। इस नदी पर गुजरात के एकतानगर (नवागाम) में बना सरदार सरोवर डैम देश की सबसे बड़ी बहुउद्देश्यीय जल परियोजनाओं में से एक है। इसकी लंबाई लगभग 1,210 मीटर और ऊंचाई लगभग 163 मीटर है, जबकि इसकी जल भंडारण क्षमता करीब 4.75 मिलियन एकड़ फीट है। इसका मुख्य उद्देश्य जल संग्रह, सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना है। एक समय कच्छ, सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात जैसे क्षेत्रों में पानी की भारी कमी थी। वर्षा पर निर्भर खेती के कारण किसानों को बार-बार नुकसान उठाना पड़ता था। लेकिन सरदार सरोवर डैम के कारण अब लगभग 17.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र गुजरात में और 2.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र राजस्थान में सिंचाई सुविधा प्राप्त कर रहा है। इससे किसानों ने गेहूं, कपास, जीरा, तिल, मूंगफली, सब्जियां और फलों की खेती शुरू की है, जिससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हुई है। करीब 13 लाख किसान परिवार इस योजना से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ पेयजल उपलब्धता है। इसके माध्यम से गुजरात के लगभग 10,453 गांवों और 190 शहरों को तथा राजस्थान के 1,336 गांवों और 3 शहरों को पीने का पानी मिल रहा है। इससे लगभग 3 करोड़ से अधिक लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध हुआ है। खासकर सौराष्ट्र और कच्छ में, जहां महिलाओं को पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था, अब पाइपलाइन से घरों तक पानी पहुंच रहा है, जिससे स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार हुआ है। सरदार सरोवर परियोजना की एक विशेषता इसका विशाल नहर नेटवर्क है, जिसकी लंबाई लगभग 70,000 किलोमीटर तक फैली हुई है। नर्मदा मुख्य नहर लगभग 458 किलोमीटर लंबी है और दुनिया की सबसे बड़ी लाइनिंग वाली नहरों में से एक मानी जाती है। यह नेटवर्क 17 जिलों, 77 तालुकों और हजारों गांवों तक पानी पहुंचाता है। यह परियोजना ऊर्जा उत्पादन में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। इसकी कुल स्थापित क्षमता लगभग 1450 मेगावाट है और अब तक 69,000 मिलियन यूनिट से अधिक बिजली उत्पादन किया जा चुका है। इसके अलावा नहरों पर छोटे हाइड्रो पावर प्लांट और सोलर प्लांट भी स्थापित किए गए हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा का उदाहरण हैं। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी यह परियोजना सराहनीय है। डूब क्षेत्र में कटे प्रत्येक पेड़ के बदले 67 पेड़ लगाए गए हैं और शूलपाणेश्वर अभयारण्य का विस्तार कर जैव विविधता को संरक्षित किया गया है। आज सरदार सरोवर क्षेत्र एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन चुका है। यहां स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी विश्वभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। विश्व जल दिवस हमें यह संदेश देता है कि पानी की हर बूंद अनमोल है। बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन के दौर में जल संरक्षण और प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। सरदार सरोवर परियोजना यह दर्शाती है कि यदि प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग किया जाए तो वे समाज के समग्र विकास का आधार बन सकते हैं। अतः हमें जल बचाने, वर्षा जल संचयन करने और पर्यावरण की रक्षा करने का संकल्प लेना चाहिए। क्योंकि सच ही कहा गया है - “पानी बचाना यानी भविष्य बचाना।” सतीश/21 मार्च