:: स्मार्टफोन के डिजिटल जहर से बचाएं बचपन; बग्घी पर सवार होकर ईदगाह पहुँचे डॉ. इशरत अली, कौमी एकता और स्वदेशी का दिया मंत्र :: इंदौर (ईएमएस)। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में शनिवार को ईद-उल-फितर का पर्व अकीदत, उल्लास और सामाजिक सुधार के संकल्प के साथ मनाया गया। सदर बाजार स्थित मुख्य ईदगाह मैदान पर जब हजारों हाथ खुदा की बारगाह में एक साथ उठे, तो पूरी फिजा अमन और भाईचारे की दुआओं से सराबोर हो गई। इस मुकद्दस मौके पर शहर काजी डॉ. इशरत अली ने अपने खुतबे (संबोधन) में समाज की दुखती रग पर हाथ रखते हुए उन कुरीतियों पर करारा प्रहार किया, जो दीमक की तरह नई पीढ़ी को खोखला कर रही हैं। नमाज के बाद समाज को झकझोरते हुए डॉ. इशरत अली ने नशे को नस्लों का हत्यारा करार दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जो लोग चंद रुपयों के लालच में नशा बेचकर हमारे बच्चों का भविष्य अंधकार में ढकेल रहे हैं, समाज को उनका पूर्णतः बहिष्कार करना चाहिए। डॉ. अली ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशा अब एक सामान्य चलन बनता जा रहा है, जबकि पूर्व में इसे घृणा की दृष्टि से देखा जाता था। यह केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि परिवारों को भी उजाड़ रहा है; नशे के कारण बढ़ते विवाद और तलाक की स्थितियां मासूम बच्चों के मानसिक विकास को दीमक की तरह चाट रही हैं। आधुनिक जीवनशैली के दुष्प्रभावों पर चर्चा करते हुए शहर काजी ने अभिभावकों को सचेत किया कि वे अपने नौनिहालों को स्मार्टफोन की कृत्रिम दुनिया से बाहर निकालें। उन्होंने आगाह किया कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों में नकारात्मक विचारों, चिड़चिड़ेपन और एकाकीपन को जन्म दे रहा है। डॉ. अली के अनुसार, यदि समय रहते नई पीढ़ी को डिजिटल जाल और मादक पदार्थों के चंगुल से नहीं बचाया गया, तो समाज की बुनियाद का कमजोर होना निश्चित है। ईद के अवसर पर इंदौर की वह ऐतिहासिक तस्वीर एक बार फिर जीवंत हो उठी, जो देश भर के लिए मिसाल है। वर्षों पुरानी परंपरा को निभाते हुए सलवाड़िया परिवार के हिंदू सदस्य ढोल-धमाकों के साथ शहर काजी को उनके निवास से ससम्मान बग्घी पर सवार कर ईदगाह तक लाए। इस दौरान रास्ते भर विभिन्न समुदायों ने फूलों की वर्षा कर इस गंगा-जमुनी तहजीब का स्वागत किया। शहर काजी ने गर्व से कहा कि इंदौर सफाई में तो अव्वल है ही, लेकिन यहाँ की 50 साल पुरानी अटूट कौमी एकता इसकी असली पहचान है। उन्होंने जनता से राजनीतिक चश्मा उतारकर आपसी मोहब्बत का दामन थामने की अपील की। वैश्विक अशांति का उल्लेख करते हुए डॉ. अली ने आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग दिखाया। उन्होंने इजरायल (यहूदी देशों) के उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान करते हुए स्वदेशी अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय उत्पादों का उपयोग न केवल हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि उन विदेशी ताकतों की आर्थिक कमर भी तोड़ेगा जो दुनिया भर में आतंक और अस्थिरता फैला रही हैं। उन्होंने छोटे देशों द्वारा फैलाए जा रहे आतंक पर चिंता जाहिर करते हुए स्वदेशी को ही सबसे सशक्त विकल्प बताया। नमाज के समापन के बाद पूरा ईदगाह परिसर ईद मुबारक की गूँज और गले मिलने के आत्मीय दृश्यों से गुलजार रहा। कड़े सुरक्षा घेरे के बीच संपन्न हुए इस पर्व ने न केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन किया, बल्कि सामाजिक चेतना का एक नया मार्ग भी प्रशस्त किया। प्रकाश/21 मार्च 2026