नई दिल्ली (ईएमएस)। नियमित रूप से स्मोकिंग करने वाले लोगों में कई जानलेवा रोगों का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक होता है। तंबाकू के धुएं में मौजूद हानिकारक रसायन धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं और कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। दिल्ली के जानेमाने पल्मोनोलॉजिस्ट के अनुसार धूम्रपान का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर पड़ता है। बीड़ी या सिगरेट का गर्म धुआं सीधे फेफड़ों की नलिकाओं तक पहुंचता है, जिससे वे धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। लंबे समय तक धूम्रपान करने से लंग कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा क्रोरोनिक ओब्स्टूक्टिव प्लमोनरी डिसीज (सीओपीडी) और इंफिसेमा जैसी बीमारियां फेफड़ों की कार्यक्षमता को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकती हैं, जिससे सांस लेने में गंभीर दिक्कत होने लगती है। डॉक्टरों के मुताबिक स्मोकिंग का असर केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह दिल और रक्त संचार प्रणाली को भी प्रभावित करता है। तंबाकू में मौजूद निकोटीन रक्तचाप को बढ़ा देता है, जबकि कार्बन मोनोऑक्साइड खून में ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देती है। इससे हृदय को शरीर के विभिन्न अंगों तक रक्त पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। लगातार धूम्रपान करने से धमनियों में प्लाक जमने लगता है, जिससे ब्लड फ्लो बाधित हो जाता है और हर्ट अटैक तथा कोरोनरी आर्टेरी डिसिज का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू का धुआं मस्तिष्क तक भी पहुंचता है और उसकी रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकता है। इससे स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है, जो कई मामलों में लकवा या मौत का कारण बन सकता है। इसके अलावा धूम्रपान से याददाश्त कमजोर होना, एकाग्रता में कमी और चिंता जैसी मानसिक समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं, क्योंकि यह मस्तिष्क के न्यूरोकेमिकल संतुलन को प्रभावित करता है। स्मोकिंग पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुंचाती है। तंबाकू के जहरीले तत्व पेट, पैनक्रियाज और किडनी से जुड़ी बीमारियों और कैंसर का कारण बन सकते हैं। धूम्रपान से पेट में एसिड का स्तर बढ़ जाता है, जिससे पेप्टिक अल्सर और एसिडिटी की समस्या हो सकती है। इसके अलावा यह शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को कम कर देता है, जिससे टाइप 2 डायबिटिज का खतरा भी बढ़ जाता है। धूम्रपान का असर प्रजनन क्षमता पर भी पड़ता है। पुरुषों में यह स्पर्म की संख्या और गुणवत्ता को कम कर सकता है, जबकि महिलाओं में गर्भधारण से जुड़ी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करना अजन्मे बच्चे के लिए भी खतरनाक हो सकता है और इससे समय से पहले जन्म या कम वजन वाले शिशु की समस्या हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार धूम्रपान करने वाला व्यक्ति केवल खुद ही जोखिम में नहीं होता, बल्कि उसके आसपास मौजूद लोग भी प्रभावित होते हैं। सुदामा/ईएमएस 22 मार्च 2026