राष्ट्रीय
22-Mar-2026
...


नई दिल्ली (ईएमएस)। आजकल लोगों की जीवनशैली तेजी से बदल रही है। काम का दबाव, तनाव, असंतुलित खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अक्सर लोग उनसे पूछते हैं कि क्या हार्ट अटैक से बचा जा सकता है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कुछ जरूरी जांचें करवा ली जाएं तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक सबसे पहले कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना जरूरी है। इसके साथ ही एंटीफॉस्फोलिपिड टेस्ट भी कराया जा सकता है, जिससे यह पता चलता है कि कहीं दिल की धमनियों में खून का थक्का बनने या ब्लॉकेज की आशंका तो नहीं है। यदि इन परीक्षणों में किसी प्रकार की समस्या सामने आती है तो शुरुआती चरण में ही उपचार शुरू किया जा सकता है। इसके अलावा ट्रोपोनिन टेस्ट को भी दिल से जुड़ी समस्याओं का पता लगाने में काफी अहम माना जाता है। यह परीक्षण दिल की मांसपेशियों को हुए नुकसान के संकेतों को पहचानने में मदद करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके साथ ही ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की नियमित जांच भी बेहद जरूरी है। यदि ये सभी परीक्षण समय-समय पर कराए जाएं तो हार्ट अटैक के जोखिम को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि केवल फिट दिखना या जिम जाना दिल की बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षा की गारंटी नहीं है। कई बार नियमित व्यायाम करने वाले और फिट दिखने वाले लोगों को भी हार्ट अटैक हो सकता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे अत्यधिक शराब का सेवन, धूम्रपान, पर्याप्त नींद न लेना, लगातार तनाव में रहना, बिना जरूरत के सप्लीमेंट लेना या जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करना। यदि किसी व्यक्ति को छाती में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या लगातार थकान महसूस हो रही हो तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर जरूरी जांचें करानी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार लिपोप्रोटीन और लिपिड प्रोफाइल टेस्ट दिल की सेहत का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा एपोबी ब्लड टेस्ट शरीर में उस प्रोटीन के स्तर को मापता है जो खराब कोलेस्ट्रॉल को पूरे शरीर में पहुंचाता है। वहीं हाई-सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट से यह पता लगाया जा सकता है कि शरीर में सूजन का स्तर कितना है और हृदय रोग या स्ट्रोक का खतरा कितना अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन जांचों को समय-समय पर करवाकर लोग अपने दिल की सेहत के प्रति अधिक सतर्क रह सकते हैं। मालूम हो किे देश में इन दिनों दिल का दौरा यानी हार्ट अटैक के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। चिंताजनक बात यह है कि अब यह समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि कम उम्र के लोग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। सुदामा/ईएमएस 22 मार्च 2026