लेख
22-Mar-2026
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23 मार्च2026शहीद दिवस) हर साल 23 मार्च को पूरे देश में शहीद दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन वीर सपूतों, स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को याद करने के लिए समर्पित है जिन्होंने भारत की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। शहीद दिवस केवल भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद में ही नहीं मनाया जाता, बल्कि उन सभी वीरों के सम्मान में भी इसे मनाया जाता है जिन्होंने अपनी कुर्बानी से देश की स्वतंत्रता की राह को आसान बनाया। यह दिन हमें उनकी वीरता, साहस और बलिदान की याद दिलाता है और देशभक्ति की भावना को हर दिल में जगाता है। शहीद दिवस का इतिहास भारत के संघर्षपूर्ण स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा हुआ है। अंग्रेजों ने लगभग दो सौ वर्षों तक भारत पर शासन किया और देशवासियों के जीवन को नियंत्रित किया। लेकिन जब भारत के सपूतों ने स्वतंत्रता की मांग उठाई, तो उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह की आंधी चला दी। यह विद्रोह केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर वर्ग और हर घर से लोग स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। इस दौरान भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे युवा क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आवाज़ उठाई और पूरे देश में क्रांति की ज्वाला फैलायी। 1928 में भगत सिंह और उनके साथियों ने उस ब्रिटिश पुलिस अधिकारी की हत्या कर दी, जो लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज के दौरान हुई मृत्यु के लिए जिम्मेदार था। यह घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बनी और स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी। इसके बाद 1929 में भगत सिंह ने अपने साथी के साथ मिलकर केंद्रीय असेंबली में बम फेंककर “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा लगाया। उनका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जनता को जागरूक करना था। कोर्ट में भी उन्होंने अपने विचारों के माध्यम से देशभक्ति का संदेश दिया, जिससे पूरे भारत में उनकी वीरता और साहस की गूंज फैल गई। 23 मार्च 1931 का दिन भारतीय इतिहास में एक अमर गाथा बन गया, जब अंग्रेज सरकार ने लाहौर जेल में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दे दी। उस समय भगत सिंह की उम्र मात्र 23 वर्ष थी, लेकिन उनका साहस और संकल्प किसी भी बड़े नेता से कम नहीं था। उनके बलिदान ने पूरे देश को झकझोर दिया और स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई दिशा दी। यह दिन हमें सिखाता है कि स्वतंत्रता केवल सामूहिक प्रयास से ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत साहस और समर्पण से भी प्राप्त होती है। भारत में दूसरा शहीद दिवस 30 जनवरी को मनाया जाता है, जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की शहादत की स्मृति में समर्पित है। वर्ष 1948 में इसी दिन नई दिल्ली के बिरला भवन में गांधी जी की हत्या कर दी गई थी। गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भारत को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यह सिद्ध किया कि बिना हथियार उठाए भी एक बड़ी लड़ाई जीती जा सकती है। उनका जीवन त्याग, सादगी और नैतिकता का प्रतीक था। 30 जनवरी का महत्व केवल एक महान नेता को याद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिन हमें आत्मचिंतन का अवसर भी प्रदान करता है। इस दिन देशभर में दो मिनट का मौन रखकर गांधी जी को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह दिन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपने जीवन में सत्य, अहिंसा और ईमानदारी के सिद्धांतों का पालन कर रहे हैं। गांधी जी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने स्वतंत्रता संग्राम के समय थे। तीसरा शहीद दिवस 21 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसे पुलिस शहीद दिवस के रूप में जाना जाता है। यह दिन उन बहादुर पुलिसकर्मियों को समर्पित है, जिन्होंने देश की सुरक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। वर्ष 1959 में लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना के साथ संघर्ष के दौरान कई भारतीय पुलिस जवान शहीद हो गए थे। उनकी स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है। 21 अक्टूबर का दिन हमें यह याद दिलाता है कि देश की सुरक्षा केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि देश के भीतर भी निरंतर बनाए रखी जाती है। पुलिसकर्मी दिन-रात अपनी ड्यूटी निभाते हुए समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखते हैं। उनका जीवन भी त्याग और समर्पण का उदाहरण है। यह दिवस हमें उनके योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। इन तीनों शहीद दिवसों का महत्व अलग-अलग होते हुए भी एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। 23 मार्च हमें क्रांतिकारी सोच, साहस और बलिदान की प्रेरणा देता है। 30 जनवरी हमें सत्य, अहिंसा और नैतिकता का मार्ग दिखाता है। वहीं 21 अक्टूबर हमें कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और सेवा भाव का महत्व समझाता है। ये तीनों दिवस मिलकर हमें एक जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं। आज के आधुनिक युग में जब हम अपने जीवन में व्यस्त हो गए हैं, तब इन शहीद दिवसों का महत्व और भी बढ़ जाता है। ये हमें हमारे इतिहास से जोड़ते हैं और यह याद दिलाते हैं कि हमारी आज़ादी के पीछे कितनी कुर्बानियां छिपी हुई हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन महान बलिदानों को न केवल याद रखें, बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं। अंत में, शहीद दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह हमारे दिलों में देशभक्ति की भावना को जागृत करने का एक माध्यम है। यह हमें यह सिखाता है कि देश के लिए किया गया हर छोटा-बड़ा योगदान महत्वपूर्ण होता है। जब हम इन वीरों को नमन करते हैं, तो हम अपने कर्तव्यों को भी समझते हैं और एक बेहतर समाज और राष्ट्र के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाते हैं। यही शहीद दिवस का सच्चा अर्थ और महत्व है। (वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार स्तम्भकार) (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 22 मार्च /2026