डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बीजेपी से मुकाबला करने डेढ़ लाख वाट्सएप ग्रुप बनाए कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का बिगुल बज चुका है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बीजेपी से मुकाबला करने के लिए खास तैयारी की है। जहां बीजेपी की केंद्रीय टीम डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कैंपेन में जुटी है वहीं टीएमसी ने इसे स्थानीय स्तर पर हैंडल करने की योजना पर काम कर रही है। टीएमसी ने जमीन पर और ऑनलाइन प्लेटफार्म पर अपनी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में लोगों तक अपनी पहुंच भी बढ़ाई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सीएम ममता बनर्जी की टीएमसी ने टीम का कहना है कि वह अपने कैंपेन में अपना बंगाल बनाम बांग्ला पर कब्जा को आधार बना रहे हैं। यूं कहें कि टीएमसी अपने डिजिटल कैंपेन में बांग्ला अस्मिता को उभार देती दिख रही है। टीएमसी मैसेज दे रही है कि अगर बीजेपी सत्ता में आ गई तो बांग्ला विरोधी एजेंडा चलाएंगे। इस अभियान को अंजाम तक पहुंचाने के लिए टीएमसी वाट्सऐप ग्रुप का सहारा ले रही है। इस नेटवर्क में पूरे पश्चिम बंगाल में 1.5 लाख से ज़्यादा ग्रुप और एक करोड़ से ज़्यादा लोग जोड़े गए हैं। इन ग्रुप्स में चुनावी सामग्री को तेजी से और बेहद व्यवस्थित तरीके से फैलाया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि अक्टूबर 2020 में लॉन्च किए गए ‘दीदिर दूत यानी दीदी के दूत’ मोबाइल ऐप के जरिए वह अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ लगातार सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। इस ऐप को 18 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। बताया जाता है कि इसके करीब 1.3 लाख रोजाना एक्टिव यूजर्स और करीब 7.3 लाख हर महीने एक्टिव यूजर्स हैं। यह ऐप लोगों को जोड़ने और उन्हें सक्रिय करने, दोनों तरह के काम करता है। इसमें यूज़र्स को काम सौंपे जाते हैं, उन्हें पल-पल की जानकारी मिलती है, वे इंटरैक्टिव क्विज में भाग ले सकते हैं और इसमें ऐसे गेम जैसे फीचर्स भी हैं, जिनका मकसद यूजर्स को चुनाव प्रचार से जुड़ी गतिविधियों में लगातार जोड़े रखना है। टीएमसी की आईटी सेल के प्रमुख देबांग्शु भट्टाचार्य ने कहा कि हमारी रणनीति सीधी-सादी है। हम सच बोल रहे हैं, जबकि बीजेपी झूठ फैला रही है। हमारी पार्टी के कार्यकर्ता जमीन पर भी और इंटरनेट पर भी, हर जगह सक्रिय हैं। सड़कों से लेकर इंटरनेट तक।’ उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल को निशाना बनाने वाले बीजेपी के डिजिटल अभियानों का एक बड़ा हिस्सा ऐसे लोगों की तरफ से चलाया जाता है जो राज्य के बाहर रहते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संगठनात्मक स्तर से परे, टीमएसी के अंदरूनी सूत्रों ने इस अभियान के भावनात्मक पहलू पर भी जोर दिया। उन्होंने उन बातों की ओर इशारा किया, जिन्हें बीजेपी की ओर से बंगाल को नकारात्मक रोशनी में दिखाने की बार-बार की जाने वाली कोशिशें बताते हैं, जिसमें राजनीतिक भाषणों में ‘घुसपैठिया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी शामिल है। उन्होंने कहा कि टीएमसी, गरिमा, पहचान और बंगाली अस्मिता से जुड़े सवालों को सामने लाकर इसका जवाब देना चाहती है और इस चुनाव को सिर्फ़ राजनीतिक सत्ता के लिए एक मुकाबले से कहीं ज़्यादा के तौर पर पेश कर रही है। भट्टाचार्य ने कहा कि यह प्यार और जीतने की चाहत के बीच का फर्क है। उन्होंने तर्क दिया कि वोटर इस बात में फर्क कर सकते हैं कि वे किसे बंगाल से असली प्यार है और किसे सिर्फ चुनावी प्यार। जनता को समझाना है कि बीजेपी अहंकार से भरी कोशिश कर रही है। भट्टाचार्य ने कहा कि जब वे बंगाल में हमारी योजनाओं की आलोचना करते हैं, लेकिन दूसरी जगहों पर वैसी ही योजनाएं लाने का वादा करते हैं, तो हम उनके इस विरोधाभास को सबके सामने लाते हैं। उन्होंने यह तर्क भी दिया कि इस तरह की तुलना करके पार्टी अपने इस दावे को और मजबूत करती है कि उसकी नीतियों की नकल उसके राजनीतिक विरोधी कर रहे हैं। कुल मिलाकर टीएमसी की चुनावी रणनीति में बड़े पैमाने पर काम करने, तेजी से आगे बढ़ने और लोगों की भावनाओं से जुड़ने का मेल दिखाई देता है। इसके साथ ही पारंपरिक जमीनी स्तर पर लोगों को जोड़ने के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों से जुड़ने पर भी खास जोर दिया जा रहा है। जहां एक तरफ पार्टी अपने शासन के रिकॉर्ड और कल्याणकारी पहलों को लगातार सबसे आगे रख रही है। वहीं दूसरी तरफ वह इस चुनावी मुकाबले को और भी व्यापक सांस्कृतिक और पहचान से जुड़े मुद्दों के नजरिए से पेश करने की कोशिश भी कर रही है। वह खुद को ‘असली’ के तौर पर पेश कर रही है, जबकि बीजेपी के मॉडल को वह अपनी नीतियों की ‘नकल’ करने की कोशिश बता रही है। सिराज/ईएमएस 23मार्च26 -------------------------------