नई दिल्ली (ईएमएस)। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के आरक्षण के लिए लाए गए कानून में सरकार संशोधन लाने जा रही है। संशोधन करके महिला सांसदों की संख्या एक तिहाई करने का प्रस्ताव है। इस संशोधित बिल को इसी सत्र में लाने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि 29 मार्च को ही इस बिल को लाया जा सकता है। इससे लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़कर 816 हो सकती है। वहीं, महिला सांसदों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 273 हो जाएगी। सूत्रों ने बताया कि इस कानून में संशोधन को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को संसद में कई पार्टियों के नेताओं के साथ बैठक की। उन्होंने एनसीपी (एसपी), बीजेडी, शिवसेना (उद्धव ठाकरे), वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठक की। हालांकि, अभी तक कांग्रेस और टीएमसी के साथ बैठक नहीं हुई है। संशोधित कानून में आम सहमति बनाने की कोशिश हो रही है, ताकि बिना किसी रुकावट के ये बिल पास हो जाए। केंद्र सरकार ने 2023 में महिला आरक्षण के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास किया था। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के साथ-साथ सभी राज्यों की विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। लगभग तीन साल बाद सरकार इस कानून में संशोधन करने जा रही है। इससे लोकसभा में सांसदों की संख्या 816 और महिला सांसदों की संख्या 273 हो जाएगी। बताया जा रहा है कि सीटों के निर्धारण के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का परिसीमन किया जाएगा। सभी राज्यों में लोकसभा और विधानसभा सीटों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी। ये बढ़ोतरी आनुपातिक हो सकती है। जैसे- उत्तर प्रदेश में 80 की जगह 120 लोकसभा सीटें, बिहार में 40 की जगह 60 सीटें, तमिलनाडु में 39 की जगह 58 या 59 सीटें। सीटों में इजाफा करके 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जाएंगी। ऐसा करके टीडीपी और डीएमके जैसी दक्षिण भारत की पार्टियों की वो शिकायत दूर की जा सकेगी कि जनसंख्या में ज्यादा बढ़ोतरी से उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों को फायदा होगा। दक्षिण भारत के राज्यों का तर्क रहा है कि जनसंख्या नियंत्रण में उन्होंने बेहतर परिणाम दिखाया है और उन्हें इसका दंड नहीं मिलना चाहिए। बताया जा रहा है कि इसी साल जून में परिसीमन आयोग का गठन हो सकता है। सुबोध/२३-०३-२०२६