अंतर्राष्ट्रीय
24-Mar-2026


वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच कूटनीतिक गलियारों से राहत भरी खबर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने की घोषणा के बाद अब बातचीत का मंच तैयार किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को इस महत्वपूर्ण शांति वार्ता के केंद्र के रूप में चुना जा सकता है। पर्दे के पीछे इजराइल और पाकिस्तान के अधिकारी दोनों धुर विरोधियों को एक मेज पर लाने की कोशिशों में जुटे हैं। संकेत मिल रहे हैं कि इसी हफ्ते इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय प्रतिनिधियों की बैठक हो सकती है। इस संभावित बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वांस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेयर्ड कुशनर जैसे कद्दावर नेताओं के इस्लामाबाद पहुंचने की चर्चा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर लगातार ईरानी नेतृत्व के संपर्क में हैं ताकि क्षेत्र में स्थिरता बहाल की जा सके। हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक किसी आधिकारिक बैठक की पुष्टि नहीं की है और इसे एक संवेदनशील कूटनीतिक प्रक्रिया करार दिया है। एक तरफ जहां राष्ट्रपति ट्रंप ने सकारात्मक और मजबूत बातचीत का दावा करते हुए सुलह के संकेत दिए हैं, वहीं ईरान का आधिकारिक रुख अब भी सख्त बना हुआ है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने सीधे संवाद की खबरों को फेक न्यूज बताते हुए इसे बाजार को प्रभावित करने की अमेरिकी चाल करार दिया है। इसके बावजूद, यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि मिस्र, तुर्की और खाड़ी देशों के माध्यम से बैकचैनल यानी अप्रत्यक्ष बातचीत का दौर जारी है। तनाव का मुख्य केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना हुआ है, जहां से दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति होती है। ईरान ने इस मार्ग को लगभग ठप कर दिया है और हमले रुकने तक इसे न खोलने की जिद पर अड़ा है। दूसरी ओर, इजराइल ने भी स्पष्ट किया है कि सैन्य विकल्प अब भी खुले हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, क्योंकि यदि यह वार्ता सफल रहती है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय शांति के लिए यह एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होगा। वीरेंद्र/ईएमएस/24मार्च2026 --------------------------------