कश्मीर के शिया समुदाय ने बलूचिस्तान या सिंध के लिए फंड नहीं जुटाया लौहार (ईएमएस)। कश्मीर में शिया समुदाय ने ईरान के लिए दिल खोलकर दान किया है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक ईरान के लिए पैसे, बर्तन, ज्वेलरी और अन्य कीमती सामान भेज रहे हैं। कश्मीरियों की यह दरियादिली देखकर बलूचिस्तान के मशहूर कार्यकर्ता मीर यार बलोच ने सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि ईरान को अरबों डॉलर का तेल मुनाफा है और वह खुद मिडिल ईस्ट में शिया समर्थित समूहों को फंड करता है। ईरान पाकिस्तान को भी मदद करता है और उसके पास खाड़ी देशों पर हमला करने के लिए बैलेस्टिक मिसाइलें और ड्रोन हैं। बलोच ने दुख जताकर कहा कि कश्मीर के शिया समुदाय ने कभी बलूचिस्तान या सिंध के लिए फंड नहीं जुटाया। बलूच और सिंधी लोग दशकों से पाकिस्तान के दबाव और अन्याय झेल रहे हैं, लेकिन उनके लिए कश्मीर के मुस्लिम कभी खड़े नहीं हुए। उन्होंने पूछा कि कश्मीर के लोग खामिनई के लिए क्यों दान कर रहे हैं, जबकि भारत और ईरान के रिश्ते मजबूत हैं, और खामिनई कभी भारत का समर्थन नहीं करता। विशेष रूप से यह भी देखा गया है कि किसी अन्य मुस्लिम देश में ईरान के लिए इस तरह दान नहीं किया जा रहा। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश ईरान को “टेररिस्ट देश” मानते हैं। यह उठता सवाल कि क्या कश्मीर के मुस्लिमों को किसी खतरनाक नैरेटिव के तहत भड़काया या मोहरा बनाया जा रहा है। हाल ही में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला खामिनई की मृत्यु के बाद अमेरिका और इजराइल के खिलाफ कश्मीर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। अब उसी समुदाय से दान की तस्वीरें सामने आ रही हैं। ईरानी दूतावास ने इस मदद के लिए धन्यवाद दिया और विशेष रूप से कश्मीरियों की दयालुता और भावनाओं को सराहा। कुल मिलाकर, कश्मीर में शिया मुसलमानों का ईरान के प्रति गहरा जुड़ाव और बलूचिस्तान के लिए खड़े न होने पर सवाल उठना इस क्षेत्र की जटिल राजनीतिक और धार्मिक संवेदनाओं को उजागर करता है। आशीष दुबे / 24 मार्च 2026