वाशिंगटन,(ईएमएस)। मध्य पूर्व में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष 25वें दिन में प्रवेश कर चुका है। स्थिति हर गुजरते घंटे के साथ और अधिक विस्फोटक हो रही है। जहाँ एक ओर कूटनीतिक गलियारों में शांति की चर्चाएँ हो रही हैं, वहीं ज़मीनी हकीकत हवाई हमलों, चीख-पुकार और सायरन की गूंज से भरी हुई है। विशेष रूप से बहरीन और कुवैत जैसे पड़ोसी देशों में भी सुरक्षा सायरन सुनाई दे रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चौंकाने वाला दावा कर कहा कि ईरान के एक सम्मानित नेता के साथ उनकी शांति वार्ता जारी है। ट्रंप ने सद्भावना के तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की समय सीमा भी पांच दिनों के लिए बढ़ा दी है। हालाँकि, तेहरान ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर इन्हें फर्जी खबर बताया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की गुप्त या औपचारिक बातचीत नहीं हो रही है और अमेरिका केवल दुष्प्रचार कर रहा है। युद्ध के इस चरण में ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। इस्फ़हान के खोर्रमशहर पावर प्लांट को गैस आपूर्ति करने वाली पाइपलाइन पर हवाई हमला हुआ है, जिससे ऊर्जा संकट गहरा गया है। ईरान की आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध में अब तक 208 बच्चों की मौत हो चुकी है, जो संघर्ष की भयावहता को दर्शाता है। इस क्रम में, तेहरान में एक दुखद घटना घटी जहाँ ईरान विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सईद शमागदारी और उनके दो बच्चों—मोहम्मद और रेहानेह—की उनके आवास पर हुए हमले में मौत हो गई। लेबनान में भी इज़रायली हवाई हमले जारी हैं, जहाँ बशामौन में एक आवासीय अपार्टमेंट को निशाना बनाया गया, जिसमें कई लोगों के हताहत होने की खबर है। वहीं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि ईरान और लेबनान पर हमले तब तक जारी रहने वाले है। जब तक उनके सैन्य उद्देश्य पूरे नहीं होते। नेतन्याहू ने ट्रंप के साथ अपनी बातचीत का हवाला देकर कहा कि युद्ध के मैदान में मिली जीत को मजबूत समझौते में बदलने की संभावना है। यह बयान स्पष्ट करता है कि इज़राइल कूटनीति से ज्यादा अपनी सैन्य शक्ति पर भरोसा कर रहा है। जापान में तेल आपूर्ति बाधित होने के डर से जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने घोषणा की है कि जापान 26 मार्च से अपने रणनीतिक राष्ट्रीय तेल भंडार को जारी करेगा ताकि देश की ऊर्जा आवश्यकताएं पूरी हो सकें। वर्तमान परिदृश्य में शांति की उम्मीदें धूमिल नज़र आ रही हैं। एक तरफ ट्रंप कूटनीति का कार्ड खेल रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान इसे सिरे से नकार रहा है। इज़राइल के आक्रामक रुख और निर्दोष नागरिकों की बढ़ती मौतों ने इस क्षेत्र को एक ऐसी तबाही की ओर धकेल दिया है, जिसका प्रभाव आने वाले कई वर्षों तक महसूस किया जाएगा। आशीष दुबे / 24 मार्च 2026