न्यूयॉर्क(ईएमएस)। लागार्डिया एयरपोर्ट पर एयर कनाडा के सीआरजे-900 विमान और एक भारी-भरकम फायर ट्रक के बीच हुई भीषण टक्कर ने विमानन विशेषज्ञों और आम लोगों को हैरान कर दिया है। इस हादसे में विमान का अगला हिस्सा यानी कॉकपिट पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया, जिससे दोनों पायलटों की जान चली गई। सवाल यह उठ रहा है कि जमीन से काफी ऊंचाई पर दिखने वाला विमान का कॉकपिट एक ट्रक से टकराकर इतनी बुरी तरह कैसे ध्वस्त हो गया? विमानन इंजीनियरों के अनुसार, इसके पीछे मुख्य कारण विमान की बनावट और रिलेटिव हाइट (सापेक्ष ऊंचाई) का गणित है। अमूमन विमानों की कुल ऊंचाई उनकी पूंछ से मापी जाती है। सीआरजे-900 जैसे रीजनल जेट की कुल ऊंचाई भले ही 7.5 मीटर हो, लेकिन इसका कॉकपिट जमीन से मात्र 3.5 से 4 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होता है। वहीं, एयरपोर्ट रेस्क्यू फायर फाइटिंग ट्रक की ऊंचाई भी लगभग 3 से 3.5 मीटर होती है। रविवार रात हुई इस टक्कर में विमान और ट्रक के ऊपरी हिस्से लगभग एक ही स्तर पर थे, जिससे सीधा प्रहार कॉकपिट पर हुआ। हादसे की भयावहता का दूसरा बड़ा कारण दोनों वाहनों का द्रव्यमान और गतिज ऊर्जा है। विमान का कॉकपिट एल्युमीनियम और हल्के कंपोजिट मटेरियल से बना होता है ताकि वजन कम रहे और ईंधन की बचत हो सके। इसके विपरीत, फायर ट्रक का वजन 30 से 40 टन तक होता है और इसका ढांचा मोटे स्टील से तैयार किया जाता है। जब 39 किमी/घंटा की रफ्तार से रोलआउट कर रहा विमान इस फौलादी ट्रक से टकराया, तो कम गति के बावजूद भारी वजन के कारण उत्पन्न मोमेंटम ने कॉकपिट के परखच्चे उड़ा दिए। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि यह टक्कर एयरबस ए320 या बोइंग 787 जैसे बड़े विमानों के साथ होती, तो शायद कॉकपिट बच जाता क्योंकि उनके केबिन जमीन से काफी अधिक ऊंचाई पर होते हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने गलतफहमी में फायर ट्रक को रनवे पार करने की अनुमति दी थी। अंतिम क्षणों में स्टॉप की चेतावनी दी गई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। यह हादसा विमानन सुरक्षा में तकनीकी डिजाइन और मानवीय समन्वय की महत्ता को एक बार फिर रेखांकित करता है। वीरेंद्र/ईएमएस/24मार्च2026