राष्ट्रीय
24-Mar-2026
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महिलाओं के स्थायी सेवा के अधिकार में अब कोई दखल नहीं नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा फैसला हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन (पीसी) देने के अपने पिछले निर्णयों को सही माना है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना में महिलाओं के स्थायी सेवा के अधिकार में अब कोई दखल नहीं दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि महिला अधिकारियों को पहले से दिया गया परमानेंट कमीशन बरकरार रहेगा, और यह साफ कर दिया कि मौजूदा व्यवस्था में कोई दखल नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि महिला अधिकारी खास तौर पर शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी (एसएससीओएस) और वे लोग जिन्होंने मामले में दखल दिया था जिन्हें कानूनी कार्रवाई के दौरान किसी भी चरण में सेवा से मुक्त किया गया था, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी कर चुका माना जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, वे पेंशन से जुड़े फायदों की हकदार होंगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पेंशन के फायदे तब दिए जाएंगे, लेकिन ये अधिकारी वेतन के किसी भी बकाया के हकदार नहीं रहने वाले है। इस फैसले को सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जो भारतीय सेना में महिला अधिकारियों के अधिकारों और सेवा शर्तों को और मज़बूत करता है। आशीष दुबे / 24 मार्च 2026