सीहोर (ईएमएस)। प्रमुख पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष श्याम जोशी के आव्हान पर जिलाध्यक्ष सुन्दरलाल राठौर के नेतृत्व में सीहोर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें बताया गया कि वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पेंशनर्स के विरूद्ध जारी वैद्यता अधिनियम 2025 जो इस सिद्धांत को मान्यता देता है कि केन्द्र सरकार को अपने पेंशनर्स का वर्गीकरण करने और उनके बीच अन्तर बनाये रखने का अधिकार है, 29 मार्च 2025 को जारी नोटीफिकेशन से लागू हो गया है। इसे बिना पूर्व सूचना के वित्त विधेयक के भाग के रूप में पेश किया गया और 25 मार्च 2025 को लोकसभा द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है। यदि यह अधिनियम अक्षरश: लागू होता है तो पेंशनभोगियों की सेवानिवृत्ति की तिथि, पेंशन पात्रता के संबंध में वर्गीकरण और उनके बीच अन्तर का आधार होगा, जिससे केन्द्रीय वेतन आयोग (या किसी भी वेतन आयोग ) के कार्यकाल से पहले के पेंशनर्स वेतन आयोग की सिफारिशों के लाभ से वंचित हो जाएगें। मौजूदा पेंशनभोगियों को इस कठिन समय में पेंशन वृद्धि का लाभ ना मिलने के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ेगा । सरकार के घोषित उद्देश्यों के विरूद्ध है कि वह अपने सभी नागरिकों को सामाजिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास करती है। यह भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक निर्णयों के भी विरूद्ध है । पेंशन एक सामाजिक कल्याणकारी व्यवस्था है, जो उन लोगों को सामाजिक-आर्थिक न्याय प्रदान करती है, जिन्होंने अपने जीवन के सुनहरे दिनों में नियोक्ता (केन्द्र / राज्य सरकार) के लिए अथक परिश्रम किया है, इस आश्वासन के साथ कि वृद्धावस्था में उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। इस निर्णय में यह भी स्पष्ट किया गया था कि पेंशन योजना का उद्देश्य पेंशनभोगियों को अभावमुक्त, सम्मानजनक, स्वतंत्र और सेवानिवृत्ति से पहले के स्तर के समकक्ष जीवन स्तर प्रदान करना है। मांग की गई है कि अधिनियम के विरोध में राजस्थान पेंशनर समाज द्वारा भी 25 मार्च 2026 को काला दिवस के रूप में मानते हुए माननीय प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन प्रस्तुत कर अनुरोध है कि केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम से सम्बन्धित वित्त मंत्रालय द्वारा दिनांक 29 मार्च 2025 को जारी अधिसूचना को तत्काल वापस लेने के सम्बन्ध में आदेश जारी कर पेंशनर्स को राहत प्रदान की जावे। ज्ञापन सौपने वालों में प्रमुख रूप से पं.राममूर्ति शर्मा, कन्हैयालाल बैरागी, हरिओम शर्मा दाऊ, प्रकाश देवगड़े, सिद्दुसिंह ठाकुर, नर्बदा प्रसाद खरे, राजेन्द्र गांधी, बेनी प्रसाद कुशवाहा, शम्भु दयाल राठौर, लखन सेन, अशोक कुमार दुबे, महेश आर्य, नन्दराम पाल, गोकुल सेन, भगवती प्रसाद शर्मा, हृदेश राठौर, मुन्नालाल प्रजापति आदि उपस्थित रहे। विमल जैन, 25 मार्च, 2026