ज़रा हटके
26-Mar-2026
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-ट्रंप कर रहे प्रोडक्टिव बातचीत का दावा, ईरान ने कहा- नाकामी छिपाने की रणनीति वाशिंगटन (ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां सच और झूठ के बीच की लकीर धुंधली पड़ रही है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि ईरान के साथ प्रोडक्टिव बातचीत हो चुकी है और जल्द जंग खत्म हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ ईरान के बड़े नेता इन दावों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। यही वजह है कि इस जंग में अब सिर्फ मिसाइलें ही नहीं, बल्कि नैरेटिव की भी लड़ाई चल रही है। हर पक्ष अपनी कहानी गढ़ रहा है, जिससे आम लोगों के लिए यह समझना मुश्किल है कि आखिर सच क्या है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि उनकी किसी टॉप ईरानी अधिकारी से अच्छी बातचीत हुई और कई बड़े मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन दिलचस्प बात है कि यह बयान उसी समय सामने आया, जब अमेरिका में शेयर बाजार खुल रहा था। उन्होंने ईरान को 5 दिन का समय भी दिया, जो ट्रेडिंग वीक के आखिर दिन पर खत्म होता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह टाइमिंग महज संयोग नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों में तेल की कीमतें तेजी से ऊपर-नीचे हुई हैं, जो 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। ऐसे में हो सकता है कि डील की बात करके बाजार को स्थिर करने की कोशिश की जा रही हो। यह भी माना जा रहा है कि बातचीत की आड़ में अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य तैयारी को और मजबूत करने का समय हासिल कर रहा है। अगर जमीनी हमला होता है, तो इसके लिए सैनिकों की तैनाती जरूरी होगी। इस बीच खबर यह भी है कि अमेरिका कमोबेश 1000-3000 एयरबॉर्न सैनिकों को मिडिल ईस्ट में तैनात किया जा रहा है। वहीं, ट्रंप के दावे के तुरंत बाद जब ईरान की प्रतिक्रिया आई तो दावे को फेक न्यूज करार दिया गया। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने साफ कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है, उनके मुताबिक यह सब तेल और फाइनेंशियल मार्केट को प्रभावित करने और अपनी नाकामी छिपाने की रणनीति है। दरअसल, दोनों देशों के अपने-अपने फायदे हैं। अमेरिका चाहता है कि बातचीत की खबरें सामने आएं, ताकि बाजार शांत रहे और आर्थिक दबाव कम हो। वहीं ईरान चाहता है कि दुनिया पर इस जंग का आर्थिक असर ज्यादा से ज्यादा पड़े, ताकि अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बढ़े। अगर जंग के भविष्य की बात करें, तो तस्वीर और भी गंभीर हो जाती है। ट्रंप ने शुरुआत में इस जंग को छोटा ऑपरेशन माना था, लेकिन इसके असर सामने आ रहे हैं तो उनपर दबाव बढ़ रहा है। पेट्रोल की कीमतें बढ़ रही हैं और अमेरिका में चुनाव भी करीब हैं। ऐसे में ट्रंप के सामने दुविधा है कि जंग जारी रखें या इसे खत्म करें। युद्धविराम को लेकर ईरान का रुख क्या है? वहीं ईरान के हार्डलाइनर मानते हैं कि अभी दबाव बनाए रखना जरूरी है, खासकर तब जब इजराइल के डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा है। वहीं कुछ नरम आवाजें यह कह रही हैं कि अब बातचीत का समय आ गया है, ताकि हालात और खराब न हों। यही कारण है कि मिडिल ईस्ट की यह जंग फिलहाल खत्म होती नजर नहीं आ रही। यह सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं, बल्कि इकोनॉमी, राजनीति और रणनीति की जंग बन चुकी है। सिराज/ईएमएस 26 मार्च 2026